योग जीवन जीने की कला है -विधानसभा अध्यक्ष

Report -Ashutosh Mamgain 

दून योगपीठ, संस्कार परिवार सेवा समिति के तत्वाधान में देहरादून के  घंटाघर स्थित एमडीडीए कांपलेक्स में आयोजित योग श्री एवं आयुर्वेद श्री सम्मान समारोह के दौरान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचंद अग्रवाल ने शिरकत की।
बता दें कि एमडीडीए कांपलेक्स में दून योगपीठ संस्कार परिवार समिति द्वारा 10 दिवसीय निशुल्क योग एवं आयुर्वेद परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान विशेष योग शिविर एवं योग पर आधारित योगासन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें सफलतम छात्र छात्राओं को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा योग श्री और आयुर्वेद श्री सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने योग एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले महानुभावों को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि योग जीवन जीने की कला है , एक जीवन पद्धति हैI योग के अभ्यास से सामाजिक तथा व्यक्तिगत आचरण में सुधार आता है। योग के अभ्यास से मनोदैहिक विकारों/व्याधियों की रोकथाम, शरीर में प्रतिरोधक क्षमता की बढोतरी होतो है ।योगिक अभ्यास से बुद्धि तथा स्मरण शक्ति बढती है। श्री अग्रवाल ने कहा कि इसके साथ ही आयुर्वेद का वर्णन विभिन्न वैदिक मंत्रों में भी मिलता है , जिनमें संसार तथा जीवन, रोगों तथा औषधियों का वर्णन किया गया है। आज विश्‍व का ध्यान आयुर्वेदीय चिकित्सा प्रणाली की ओर आकर्षित हो रहा है, जिसके तहत उन्होनें भारत की अनेक जडीबूटियों का उपयोग अपनी चिकित्सा में करना शुरू कर दिया।

श्री अग्रवाल ने कहा कि विश्व में प्रत्येक वर्ष लगभग तीन करोड़ लोगों की मौत असंक्रामक बीमारियों की वजह से होती है। इसका मुख्य कारण बदली जीवन शैली और असंतुलित आहार है। आयुर्वेद और योग के जरिये हम पुरातन काल से प्रचलित परंपरागत पोषक तत्वों प्राप्त करते हुए स्वस्थ्य जीवन जी सकते हैं। साथ ही असंक्रामक बीमारियों से भी निदान पा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें आज के युग में स्वस्थ जीवन जीने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्घति को बेहतरीन ढंग से अपनाएं जाने की जरूरत है। पंचकर्म, आयुर्वेद, यूनानी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों को व्यवहारिक रुप से अपनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने संयमित जीवन जीने के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में स्वस्थ जीवन यापन के लिए नियमित रुप से योग करने का आह्वान किया।हर रोज खुली हवा में घुमने के साथ ही सुचारू रुप से योगाभ्यास करने और स्वच्छ एवं सात्विक भोजन करने की बात कही।

श्री अग्रवाल ने कहा कि किसी भी देश या प्रदेश के विकास के साथ-साथ मनुष्य निर्माण में वहां के नागरिकों के आध्यात्मिक एवं बौद्धिक विकास की अहम भूमिका होती है। परम्परागत प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति के माध्यम से योग व आयुर्वेद को बढ़ावा देकर हम इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकते हैं। इसी के कारण भारत को पूर्व में विश्व गुरु का दर्जा हासिल था और आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में देश अपने इस दर्जे को पुन: हासिल करने की ओर अग्रसर है।

इस अवसर पर दून योगपीठ के अध्यक्ष योगाचार्य विपिन जोशी, भारतीय योग संस्थान के अजित पवार जी, संरक्षक राधे श्याम जोशी, मोहनलाल विरमानी, सुधीर वर्मा, श्रीमती रंजीता राणा, शशिकांत दुबे, जेएन कोठियाल, डॉ सपना डिमरी, श्री हरीश जौहर सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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