जिसमें बकरियाँ चुनेंगी ख़ुद के लिए मनपसंद वर

जी हाँ सही पढ़ा आपने विश्व में पहली बार उत्तराखंड राज्य के टिहरी गढ़वाल की तहसील नैनबाग़ के पंतवाड़ी गांव में 3 बकरियां अपने लिए बकरे खुद चुनेंगी।

सुनने में शायद आपको थोड़ा अज़ीब लग रहा हो लेक़िन ये ख़बर बिल्कुल पुख़्ता है।

उत्तराखंड राज्य के पशुपालन विभाग और एनजीओ ग्रीन पीपल के इस संयुक्त प्रयास को नाम दिया गया है बकरियों का स्वयंवर। टिहरी ज़िले के गांव पंतवारी को इस स्वयंवर को साक्षात करने के लिए चुना गया है।  बकरियों की नस्ल और गुणवत्ता के आधार पर गांव की तीन सर्वश्रेष्ठ बकरियों को शादी के लिए चयनित किया गया है। 24 फरवरी यानी महाशिवरात्रि के दिन गांव में इन बकरियों के लिए स्वयंवर का आयोजन होगा। आसपास के गांव के 15 श्रेष्ठ नस्ल वाले बकरे को स्वयंवर के लिए आमंत्रित किया गया है। गीत संगीत और अन्य रंगारंग आयोजनों के बीच स्वयंवर का संचालन होगा। पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुसार एक बकरी के साथ पांच बकरों को छोड़ा जाएगा। इस तरह बाकी दोनों बकरियों के साथ शेष दस में से पांच-पांच बकरों को छोड़ा जाएगा। दिन भर साथ रहने के दौरान जिस बकरे के साथ बकरी अपना ज्यादा समय बिताएगी उसके साथ उसकी शादी करायी जाएगी। शादी के लिए सारे इंतजाम भी कर लिये गये हैं। इस आयोजन के प्रति गांव में काफी उत्साह है। बाहरी तौर पर यह एक अनावश्यक और उबाऊ कार्यक्रम की तरह लगता है। परंतु इसका उद्देश्य बड़ा नेक है। एनजीओ ग्रीन रिपब्लिक के महा प्रबंधक अजय घाले ने मीडिया को बताया है कि हम इस स्वयंवर के जरिये टिहरी में अच्छी नस्ल के बकरे और बकरियों की पैदाईश पर जोर देना चाहते हैं। इससे बकरी के दूध और मांस की गुणवत्ता बढ़ेगी और उसका निर्यात बढ़ेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन होगा। जल्द ही इस तरह के आयोजन प्रदेश के अन्य हिस्सों में किये जाएंगे। 24 फरवरी को होने वाले इस आयोजन को पशुपालन विभाग का भी सहयोग मिल रहा है। स्वयंवर स्थल पर पशुपालन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी  मौजूद रहेंगे और गांव के मवेशियों का परीक्षण कर उनके लिए पौष्टिक आहार और दवाईयों का वितरण भी करेंगे। यह आयोजन कितना सफल होगा और रोजगार सृजन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा यह समय बतायेगा। परंतु पशुबलि खासकर बकरे की बलि को लेकर चर्चित रहने वाले पहाड़ के अंचल में यदि बकरे का स्वयंवर आयोजित हो रहा है तो इसकी सराहना होनी चाहिए। आपने अक्सर एक कहावत सुनी होगी कि  जोड़ियाँ उपर से बनकर आती है लेकिन पहली बार उत्तराखंड का पंतवारी साक्षात् करेगा कि यहाँ जोड़ियां, बाड़ियों में बनती हैं।इस आयोजन में देश व दुनियाँ से पत्रकारों के पहुँचने की भी उम्मीदें ग्रीन पीपल को है। बहरहाल तो आप भी तैयार होजाइये इस अनोखे स्वयंवर में शामिल होने हेतु , 24 फरवरी यानी महाशिवरात्रि के दिन पंतवारी गांव पहुँचे।

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