पुलिस शहीद स्मृति दिवस शहीद पुलिसकर्मीयों को दी श्रद्धांजलि

पुलिस शहीद स्मृति दिवस शहीद पुलिसकर्मीयों को दी श्रद्धांजलि

देहरादून,पुलिस शहीद स्मृति दिवस के अवसर पर पुलिस लाईन देहरादून में एक श्रृद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्यमंत्री हरीश रावत मुख्य अतिथि के रुप में तथा गृहमंत्री प्रीतम सिंह विशिष्ट अतिथि,सांसद टिहरी श्रीमती माला राज्य लक्ष्मी, मंत्री दिनेश अग्रवाल, विधायक राजकुमार, मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह, प्रमुख सचिव गृह उमाकान्त पंवार, सचिव गृह विनोद शर्मा, अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अनिल के.रतूडी, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन राम सिंह मीना, अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सतर्कता सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं गणमान्य महानुभाव उपस्थित थे और उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर विगत एक वर्ष के दौरान देश में शहीद हुए 471 पुलिस कर्मियों को श्रृद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान अपने संबोधन में सीएम हरीश रावत ने कहा कि आज का दिन पूरे भारत में ‘‘पुलिस स्मृति दिवस‘‘ के रूप में मनाया जाता है व इस अवसर पर सम्पूर्ण भारत वर्ष में शहीद हुये पुलिस-जनों को श्रृद्धांजलि दी जाती है। आज हम उन बहादुरों को शत्-शत् नमन् करते हैं जिन्होंने कर्तव्य-पालन के समक्ष अपने प्राणों की आहूति देने में भी संकोच नहीं किया।
देश के भीतर शान्ति व कानून व्यवस्था बनाये रखने का उत्तरदायित्व अर्द्ध सैनिक बलों एवं राज्यों की पुलिस का है। अपने इसी उत्तरदायित्व को  पूर्ण निष्ठा से निभाते हुए गत वर्ष सम्पर्ण भारत में कुल-471 अर्द्ध सैनिक बलों एवं विभिन्न राज्यों के पुलिस कर्मी शहीद हुए हैं, जिसमें से उत्तराखण्ड के 01 प्लाटून कमाण्डर, 01 हेड कान्सटेबिल एवसं 08 कान्सटेबिलों सहित 10 वीर सपूतों ने कर्तव्य की वेदी पर अपनी प्राणों की आहूति दी।
ड्यूटी के दौरान प्राणों की आहुति देने वाले ये पुलिस कर्मी हम सब के लिए प्रेरणा के श्रोत हैं। सम्पूर्ण भारतवासी  शहीद पुलिस कर्मियों को हार्दिक श्रृद्धांजलि देते हुए आज नतमस्तक हैं। इस अवसर पर इन वीर शहीदों के परिजनों के प्रति भी अपनी हार्दिक संवेदनायें व्यक्त करता हॅू।
देश के समक्ष आन्तरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती नक्सलवाद तथा आतंकवाद है। हमें इन चुनौतियों का डट कर सामना करना है तथा आतंकवाद और उग्रवाद को जड़ से उखाड़ने का कार्य करना है। आज विश्व में कोई भी देश ऐसा नहीं है जो स्वयं को आतंकवाद के खतरे से अछूता मान सके। भारत में भी यह खतरा कुछ संयोजित आतंकवादी संगठनों से है जिनसे निपटने के लिए एक सुनियोजित रणनीति के तहत कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है।
उत्तराखण्ड राज्य की अन्तर्राष्ट्रीय सीमायें नेपाल एवं चीन से  एवसं  अन्तर्राज्यीय  सीमायें  उत्तर प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश से लगती है। यह प्रदेश भौगोलिक एवं सामरिक महत्व के दृष्टिगत राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अत्यन्त संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण है। उत्तराखण्ड पुलिस के समक्ष कई चुनौतियाॅं हैं। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि उत्तराखण्ड पुलिस अपनी उपलब्ध जनशक्ति तथा संसाधनों से इन चुनौतियों का सामना करने में सपफल होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *