लोकसभा चुनाव के परिणामस्वरूप दोबारा से प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी की नयी केबिनेट  में हरिद्वार के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक को मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में चुना गया है। निशंक  उत्तराखंड के पूर्व सीएम भी रह चुके हैं। लेकिन अब जब वे  केंद्रीय मंत्री बन गये तो उनकी डिग्री पर विवाद होना शुरू हो गया है। निशंक अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाते हैं, लेकिन ये अस्पताल के डॉक्टर नहीं हैं बल्कि पीएचडी वाले डॉक्टर हैं। निशंक को श्रीलंका स्थित इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से एक नहीं बल्कि दो-दो मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली हुई है, लेकिन ये क्या उस यूनिवर्सिटी के नाम ही विवाद खड़ा हो गया !  इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका में यह यूनिवर्सिटी रजिस्टर्ड ही नहीं है।

What is HRD Minister Ramesh Pokhriyal Nishank fake degree controversy

            90 के दशक में कोलंबो ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने निशंक को डी लिट (Doctor of Literature) की डिग्री दी थी। यह डिग्री उनके शिक्षा में योगदान के लिए  दी गई थी, और उसके कुछ साल बाद की बात है इसी यूनिवर्सिटी ने उन्हें एक और डी लिट डिग्री दी। इस बार विज्ञान में योगदान के लिए उन्हें डिग्री दी गई।

               अब जब उस यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रेशन की बात आई तो पता लगा है की ये ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी श्रीलंका में न तो विदेशी और न ही घरेलू यूनिवर्सिटी के तौर पर रजिस्टर्ड है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुतााबिक श्रीलंका के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसकी पुष्टि की है। पिछले साल देहरादून में निशंक की शिक्षा को लेकर एक आरटीआई फाइल की गई थी, लेकिन उसमें भी आधी अधूरी जानकारी दी गई।

               चुनाव आयोग को दिए गए एफिडेविट में निशंक अपनी पढ़ाई लिखाई के बारे में बताया है कि उन्होंने हेमवती बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से एम.ए किया है। उन्होंने ये भी बताया है कि उनके पास पीएचडी  और डी. लिट की भी डिग्री है। लेकिन किस यूनिवर्सिटी से है और कब मिली इसका कोई जिक्र नहीं किया गया  है। 

 

विवाद पर निशंक ने कहा है कि- 

“मैंने कोई ग़लत काम नहीं किया है, इसलिए डरता नहीं हूं। मैं निशंक हूं, जिसका मतलब ही किसी से ना डरने वाला इन्सान है।” 

पिछली एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री पर भी हो चुका है विवाद –  

             2014 में मोदी पिछली सरकार की केबिनेट में  स्मृति ईरानी को एचआरडी मिनिस्टर बनाया गया था।  उनकी डिग्री को लेकर भी विवाद हुआ, जो  2019 के चुनाव तक चलता रहा। ईरानी ने 2004 में दिए गए एफिडेविट में बताया कि उन्होंने बीए किया है, लेकिन 2011 में राज्यसभा के चुनाव के दौरान उन्होंने जो हलफनामा दिया उसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने बी.कॉम पार्ट-1 किया था। 2014 में ईरानी ने बताया कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से 1994 में बैचलर्स ऑफ कॉमर्स पार्ट-1 किया है। 2004 में उन्होंने खुद को ग्रेजुएट बताया था। अब जब वे खुद ही इस बात का फैसला नहीं कर पा रही हैं कि आखिर उन्होंने ग्रेजुएशन में डिग्री ली कोण सी है, तो ऐसे में विवाद खड़े होना तो लाजमी है। स्मृति ईरानी पे विवाद इस बात का है की आखिर वे ग्रेजुएट हैं भी या नहीं।

डिग्री विवाद पर ईरानी ने इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम में कहा था कि- 

”लोग मुझे अनपढ़ कहते हैं. लेकिन मैं बता दूं कि मेरे पास येल यूनिवर्सिटीकी भी डिग्री है. येल यूनिवर्सिटी ने मेरी लीडरशिप क्वालिटी को सेलिब्रेट किया था.”

 

 

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