नागरिक पत्रकारिता का नया दौरः वेब मीडिया

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नागरिक पत्रकारिता का नया दौरः वेब मीडिया

20 वीं सदी के जाते-जाते सूचना प्रौद्योगिकी का जो विकास हुआ उसका प्रभाव व्यापक था। इस बात का प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं। जहां दफतरों में यांत्रिक टंकण यंत्रों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक टाइपराइटरों तक की छुट्टि हुई वहीं समाचारपत्रों की दुनिया में भी क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। फोटोटाइप सेंटिग की पद्वति से लेकर रिपोर्टिंग और संपादन तक के काम में कंप्युटर ने प्रवेश कर कहीं कार्य पद्धति बदली तो कहीं काम को सरल बनाया। इसी सूचना प्रौद्योगिकी और संचार प्रौद्योगिकी के मेल ने जिस इंटरनेट का विकास किया उसकी वजह से अखबारों के अनेक शहरों से संस्करण निकलने संभव हुए और भारतीय भाषाओं विशेषकर हिंदी के समाचारपत्रों का जैसा विस्तार हुआ उसकी तो किसी ने कल्पना भी नही की होगी। दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान जैसे कई अखबारों की बढती पाठक संख्या इसके प्रमाण हैं। और इसका एकमात्र कारण और साधन था वेब पत्रकारिता, पत्रकारिता की दुनिया में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है जो परिवर्तनशील तकनीकी परिवेश में एक चैराहे पर खड़ा है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच वाले इस शक्तिशाली माध्यम की सफलता के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि इसके पत्रकारों में पांरपरिक पत्रकारिता की समझ के साथ-साथ बदलते तकनीकी परिवेश में एक लोचपूर्ण वैचारिक अंतरसंबधो का भी समावेश हो।
पंरपरागत माध्यमों के इतर इंटरनेट से होने वाली पत्रकारिता को वेब पत्रकारिता कहा जाता है। किसी भी यर्थाथ या वास्तविक जीवन के घटनाक्रमों का रिर्पोंटरों लेखकों और संपादकों द्वारा किसी खास दृष्टिकोण से किया गया वर्णन पत्रकारिता है। परंपरागत पत्रकारिता में किसी घटना को अखबारों में छापते हैं या टेलिविजन या रेडियो द्वारा प्रसारित करते हैं, लेकिन वेब पत्रकारिता इन सभी का सम्मिलत रूप है। यहा समाचारों को पढा देखा और सुना जा सकता है।
वेब ने सूचनाओं में मानों पंख लगा दिये हों। किसी घटना की जानकारी देने के लिए इसमे विशेष औपचारिकता की आवश्यकता नही होती है, बस सिर्फ इसे संप्रेषित करना होता है। जैसे कोई वेब पत्रकार किसी घटना से अवगत होता है तो वह उस खबर को तुरंत आॅन लाॅइन कर देता है। और समय-समय पर अपडेट भी करता रहता है। ऐसा पारंपरिक या अन्य माध्यमों से संभव नही है। इसका एक जाना माना संदर्भ है कि जब जार्ज स्पेट ने फिजी में सांसदों को बंधक बनाया तो यह खबर इंटरनेट के माध्यम से ही पूरे विश्व पटल तक पहुंची इसके बाद रेडियो टेलिविजन और अखबारों ने इस खबर को उजागर किया। वर्तमान समय में वेब अखबार और पोर्टल की बाड़ से आ गयी है। आज सभी समाचार, फीचर, लेख, स्टोरी पोर्टल और उसके वट्स एप जैसे एप्लिकेशन के माध्यम से प्रचार का जरिया बन गये हैं। वेब पोर्टल ने वास्तव में वसुदेव कुटुंबकम की संकल्पना को साकार किया है। यह एक और जहां सूचना और समाचारों की उत्सुकता को शांत करता है वहीं दूसरी और पाठकों और दर्शकों की बौद्धिक भूख को भी समाप्त करता है।इस यात्रा में अगला पड़ाव तब आया जब अंग्रेजी और बाद में अन्य भाषाओं के अखबारोें के इंटरनेट संस्करण तैयार किए जाने लगे और देश-विदेश के असंख्य पाठकों को अपनी भाषा में बड़े शहरों की ही नहीं बल्कि कस्बे देहात के समाचार भी पढने को मिलने लगे। यहीं से आरंभ हुई वेब पत्रकारिता जिसमें बाद में और भी विधाएं शामिल होती गई। वेब पोर्टल पर समाचार का प्रसारण जिसके उदाहरण आपको याहू, एमएसएन, गूगल, रेडिफमेल में दिखाई देते हैं। इसके अलावा कई अखबारों ने तो खुद के पोर्टल तक बना डाले जिनमें हिंदी के अखबार नयी दुनिया का पोर्टल वेब दुनिया सबसे मशहूर है और उसे हिंदी का पहला पोर्टल होने का श्रेय भी हासिल है। वेब पत्रकारिता में एक नया विकास हुआ ब्लाॅग के आंरभ के साथ जब इंटरेट लाॅगिंग की व्यवस्था को सेवा प्रदाता से नेट पर जाने के अलावा ई-मेल और अन्य वेब सर्वरों तक पहुंचने की पद्धति लोकप्रिय होती गई। वेब लाॅगिंग अर्थात ब्लाॅग का तात्पर्य था वेब पर व्यक्तिगत डायरी। लेकिन लोगों ने इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की अभिव्यक्तियों के लिए किया। किसी ने ब्लाॅग पर साहित्य लिखा, किसी ने अपने दर्द , किसी ने अपने आस-पास के समाज और यर्थाथ को अभिव्यक्त किया।ब्लाॅग का एक रूप नागरिक पत्रकारिता के रूप में भी दिखायी देता है। लेकिन जिस तरह से पिछले दिनों में जिस तरह से पत्रकारिता की सीमा का विस्तार हुआ है उससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि पूंजी चाहे कितनी भी अधिक क्यों न हो किसी भी मीडिया संस्थान के लिए अब यह संभव नही है कि वह समाचार एकत्रित करने के लिए उपलब्ध हो। ऐसे में नागरिक पत्रकारिता एक और तो मीडिया संस्थानों के हित साधती है वहीं दूसरी और कंप्यूटर, इंटरनेट, वीडियो कैमरों और वीडियो संपादन के साधनों के लगातार सस्ते होने से भी आम नागरिक को यह सुविधा मिली है कि वह अपने आसपास की घटनाओं की फिल्म बनाए या उनके बारें में ब्लाॅग आदि पर लिखकर लोगों तक पहुंचाए। ई -प्रशासन, ई-शिक्षा, ई-कृषि, ई-वाणिज्य, ई-बैकिंग जैसे अनेक क्षेत्र सूचना प्रौद्योगिकी के वे रूप हैं जो इसे नव माध्यम के तौर पर स्थापित कर रहे हैं। वेब पत्रकारिता से लेकर नव माध्यम के संपूूर्ण क्षेत्र में संप्रेषण कौशल , सूचना प्रौद्योगिकी का ज्ञान एवं भाषा ज्ञान रखने वाले नोजवानों की आवश्यकता हे। इसीलिए आजकल जनसंचार और पत्रकारिता के विभिन्न पाठ्यक्रमों में कंप्युटर और वेब पत्रकारिता, वेब डिजाइनिंग और ब्लाॅग लेखन के पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं।

आशा असवाल ( शोधार्थी /पत्रकारिता शिक्षिका)

 

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