” महँगा रोये एक बार,सस्ता रोये बार बार “

 

 

अगर आपने भी ख़रीदा है डिस्काउंट में दुपहिया वाहन तो यह ख़बर आपके ही लिए है जनाब

महँगा रोये एक बार,सस्ता रोये बार बार

ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी तो अब इस कहावत को आप सच होता भी देख सकते है।

आपको बता दें कि जिन भी व्यक्तियों ने 10 से 15000 के डिस्काउंट पर गाड़ियां खरीद ली है उन लोगों के लिए एक बड़ी चौकाने वाली निराशापूर्ण ख़बर यह आ रही है कि 31 मार्च के बाद होने वाले सभी रजिस्ट्रेशन पर बीएस-4 पॉल्युशन किट लगवाना अनिवार्य रहेगा जिसकी अनुमानित कीमत 17000 से 20000 के लगभग आंकी जा रही है, कंपनी ने अपना स्टॉक क्लियर ग्राहकों के साथ एक बहुत बड़ी सोची समझी साजिश के तहत किया है। फिलहाल तो इस प्रकार की ही खबर मीडिया में चल रही है कि छूट बाली गाड़ियों में अब किट लगवानी पड़ सकती है, जिसके लिए ग्राहकों को अपनी जेब से और 17000 से 20000 के लगभग ढीले करने पड़ सकते है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश में सस्ते वाहन बिक्री पर त्राहिमाम मचा हुआ था। जहाँ एक ओर ऑटो इंडस्ट्री की कंपनियां उम्मीद लगाए बैठी थीं कि उन्हें कोर्ट से एक वर्ष तक का वक्त और मिल जाएगा अपना पुराना माल खपाने के लिए लेकिन कोर्ट ने उनकी इस आस को ठन्डे बस्ते में रखकर अपना फैसला दिया। जिससे ऑटो इंडस्ट्री की कुछ कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है। आपको बता दे कि लगभग 9 लाख की इंवेंटरी पूरी इंडस्ट्री में अभी भी शेष थी और सुप्रीम कोर्ट से मिली निराशा के बाद जब इन कंपनियों ने अपने दुपहिया वाहनों पर 22 हजार रुपये तक डिस्‍काउंट ऑफर किया तो मानों ग्राहकों की तो चाँदी चाँदी हो गयी और कंपनियों को भी अपने नुक्सान से भरपाई का एक मौका मिला गौरतलब है कि सूत्रों से मिली जानकारियों के आधार पर सबसे ज्यादा बीएस3 इंवेंटरी हीरो व हौंडा के पास है। दुपहिया इंडस्‍ट्री के मुताबिक हीरो व हौंडा के पास अभी भी 6.71 लाख वाहन बचे हुए थे जिन्हें कंपनियां 1 अप्रैल के बाद नहीं बेच सकती थी।

ऑटो इंडस्ट्री कंपनियों के पास इन्हें खपाने के लिए दो ही रास्ते थे या तो वो सारा का सारा माल निर्यात कर दें या फिर उन्हें नए मानक के अनुरूप अपग्रेड कर दें।यदि बात की जाये नए मानक पर अपग्रेड करने की तो इसमें कंपनियों को सबसे ज्यादा दिक्कत ट्रांसपोर्टेशन पर आती क्योंकि डीलर्स के पास से दोबारा सारे वाहनों को मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर वापस लाना काफ़ी महँगा पड़ता इसलिए जो अंतिम रास्ता कंपनियों के पास बचा वह यह कि वो सस्ते से सस्ते दाम पर अपने वाहनों को बेच दें।

इसी के चलते ग्राहकों को जानकारी के आभाव में रखकर बीते दिनों में दुपहिया वाहनों पर भरी डिस्काउंट 22000 रुपये तक दिया गया था।यहाँ ये कंपनियां एक अंतिम प्रयास कर रही थी कि उनके बीएस3 मानक पर बने ज्यादा से ज्यादा माल 31 मार्च से पहले निकल जाए।

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