आपरेशन आदमखोर बाघिन

आपरेशन आदमखोर बाघिन

उत्तराखंड,रामनगर के तल्ला गौजनी गांव में वन विभाग को आपरेशन आदमखोर बाघिन में सफलता हासिल हो गई। दो लोगों को निवाला बना चुकी आतंक की पर्याय बनी बाघिन को आखिरकार वन विभाग की टीम ने गोलियों से छलनी कर दिया। बुधवार को घायल हुई बाघिन का शव गुरुवार को भवानीपुर के जंगल में मिला है। यह नरभक्षी बाघिन रामनगर इलाके में दो लोगों को अपना निवाला बना चुकी थी। कई लोगों पर घातक हमला कर चुकी थी। नरभक्षी बाघिन की दहशत इस कदर थी कि लोगों ने रात में तो क्या दिन में भी घरों से अकेले निकलना बंद कर दिया था।
आपरेशन आदमखोर बाघिन में लगे बन्नाखेड़ा के डिप्टी रेंजर पूरन चंद्र जोशी ने बताया कि बुधवार को जानकारी मिली थी कि आदमखोर बाघिन तल्ला गौजनी के जंगल में है। वन विभाग की टीम तल्ला गौजनी के जंगल में पहुंची तो बताया गया कि बाघिन को बल्लू डंगवाल के गन्ने के खेत में देखा गया है। जोशी ने बताया कि बाघिन के
खिलापफ आपरेशन में लगी टीम ने कांबिग की तो उनके साथ मोहन रावत, बलविंदर सिंह, बेअंत सिंह और हरबख्श सिंह बाघिन के हमले से बच गए। इसके साथ ही ग्रामीणों की मदद से गन्ने के खेत की घेराबंदी कर कम से कम 15 राउंड फायर गन्ने के खेत में झोक दिए गए। कुछ देर बाद पिफर गन्ने के खेत की कांबिग की गई तो खून के निशान तो मिले, लेकिन बाघिन नहीं मिली। इससे माना गया कि बाघिन घायल हो कर भाग निकली है। बुधवार को इस आपरेशन में अंधेरा हो चुका था लिहाजा गुरुवार की सुबह फिर आपरेशन शुरू करने का फैसला किया गया। गुरुवार की सुबह वन विभाग की टीम ने आपरेशन शुरू किया और आसपास के गांवों में भी सर्च आपरेशन चलाया। इस बीच भवानीपुर के ग्रामीणों ने खून में लथपथ बाघिन का शव देखकर वन विभाग की टीम को सूचना दी। जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारी भवानीपुर पहुंच गए। सिविल पुलिस भी मौके पर आ गई। वन विभाग के अपफसरों ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद आखिरी बिदाई दे दी है।
तल्ला गौजनी व भवानीपुर के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले डेढ़ माह से बाघिन का इलाके में आतंक था। क्षेत्र में यह नरभक्षी बाघिन दो लोगों को निवाला बना चुकी थी। जंगल की तरपफ काम करने निकले कई ग्रामीणों पर बाघिन ने घातक हमला किया था। जिससे कई ग्रामीण गंभीर रूप से जख्मी हुए। बाघिन के खौपफ के कारण लोगों ने रात में तो क्या दिन में भी अकेले घरों से निकलना बंद कर दिया था। रात को होने वाले कार्यक्रम रद्द कर दिए थे। वन विभाग को आदमखोर बाघिन की सूचना मिली तो वरिष्ठ अधिकारियों ने बाघिन को आदमखोर घोषित कर इसे मारने की इजाजत दे दी थी। वन विभाग से बाघिन के खात्मे की छूट मिलने पर टीमो का गठन किया गया और सर्च आपरेशन के साथ आपरेशन आदमखोर बाघिन शुरू किया गया था। डेढ़ माह के आपरेशन के बाद बुधवार को बाघिन को ढेर कर दिया गया।

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