“विश्वास करना सीखें, तोड़ना नहीं”

विश्वास ये सिर्फ़ एक शब्द ही नहीं है बल्कि हर रिश्ते की नींव है, जिस पर हर रिश्ता क़ायम है। अगर रिश्तों में विश्वास न हो तो वो अंदर ही अंदर खोखलें हो जाते है,पर जब विश्वास टूट जाता है तो इंसान भी अंदर से टूट जाता है। जो लोग दूसरों पर बहुत जल्दी विश्वास कर लेते है ऐसे लोग भावनात्मक होते है और दूसरे लोग उनका बड़ी ही आसानी से फ़ायदा उठा लेते है, इसी लिये सबसे पहले हमें ख़ुद पर विश्वास करना होगा।

विश्वास की अनेकों परिभाषा है जिन में से एक है परमात्मा पर विश्वास जो की अटूट होता है। हालात चाहे कितने ही बुरे क्यों ना हो मात्र एक विश्वास ही तो है ऊपर वाले पर, जो हमें अंदर से टूटने नहीं देता। इंसान जब हालात से लड़ कर थक जाता है तो आख़िर में परमात्मा पर विश्वास ही तो है जो उसे हारने नही देता। 
जब हालात बहुत बिगड़े हुए हो और कुछ समझ ना आ रहा हो कि क्या करना चाहिए या किस ओर जाना चाहिए। तब वक़्त आता है आत्ममंथन का और आँखें बंद कर गहरी साँस लेकर अपना मन शांत कर बस परमात्मा को याद करने का, जो हर समय तुम्हारे साथ है, तुम कभी अकेले नही थे ना हो और ना ही कभी रहोगे। तो आगे बढ़ने की सोचो चाहे तकलीफ़ कितनी भी हो उसे स्वीकार करो, जो हो चुका है उसे बार बार याद करके ख़ुद को कमज़ोर मत करो, जो जा चुका है, वो वापस नहीं आयेगा।  बस विश्वास करो ख़ुद पर,परमात्मा पर और उन पर जो तुम पर  विश्वास करते है।  देर से ही सही पर सब ठीक हो जाएगा, बस ‘विश्वास करना सीखें तोड़ना नहीं’, क्योंकि विश्वास का कोई मोल नहीं ये अनमोल है। 
अँजली पाँडेय
बी ए (मास कम्यूनिकेशन)
संशोधन:- अमित लखेड़ा 

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