ख़ुद की पहचान 

ख़ुद की पहचान 

जब ख़ुद को पहचान जाओगे
 तो ज़िंदगी जीना सीख जाओगे
तुम चाहो तो कोई तुम्हे हँसा नहीं सकता ,
ग़र तुम चाहो तो कोई तुम्हे रुला नहीं सकता
गिरते तो सब ही है अपने ज़िंदगी में ठोकरें खाकर
ग़र तुम चाहो तो संभल जाओगे
जब ख़ुद को पहचान जाओगे
तो ज़िंदगी जीना सीख जाओगे
दुखों का पहाड़ टूटे, चाहे ग़मों का सैलाब आये
ज़िंदगी एक जंग है ग़र तुम चाहो तो
हार कर भी जीत जाओगे
बनना है तो दिल के अमीर बनों दोस्तों
क्योंकि पैसों से ख़ुशी कभी खरीद नहीं पाओगे
गुरुर कभी तुम करना न दोस्तों क्यूँकि
एक दौर ऐसा भी आएगा जब अकेला ख़ुद को पाओगे
न साथ कोई रह जाएगा, और दुविधा में खुद को पाओगे
बस अपना आत्मविश्वास बनाये रखना दोस्तों
हर मुश्किल पार कर जाओगे क्यूँकि
ग़र ख़ुद को पहचान जाओगे
 तो ज़िंदगी जीना सीख जाओगे।

लेखिका:हिमानी रियाल 
छात्रा : एम.एस.सी (फिजिक्स)

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