क्या यही है TSR सरकार का भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस





हिमांशु पैन्यूली

एनएच-74 मामले में राज्य सरकार ख़ुद कठघरे में खड़ी दिखायी पड़ रही है। एक ओर तो ख़ुद राज्य सरकार एनएच घोटाले की सीबीआई जांच कराने का स्वांग कर रही है वहीं मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो केंद्र सरकार इस मामले पर सीबीआई जाँच नही करवाना चाहती, केंद्रीय मंत्री गडकरी के द्वारा सीएम को लिखे पत्र की भी कड़ी आलोचना की जा रही है मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ केंद्र ने अपने एक पत्र के जरिए सीबीआई जांच नहीं करने की मंशा जताई है। यूँ तो सत्ता में आते ही त्रिवेंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात को प्रमुखता से उठाया था लेकिन वहीं हाल ही में उजागर हुए इस एनएच घोटाला, जो कि लगभग तीन सौ करोड़ से अधिक का आंका जा रहा है और पूर्व में हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कुमाऊं कमिश्नर की जांच में एनएच-74 व एनएच-125 के चौड़ीकरण के नाम पर इस बड़े खेल का खुलासा हुआ था। जिसके बाद तत्काल हरक़त में आयी TSR सरकार ने छह पीसीएस अफसरों को निलम्बित कर सीबीआई से जांच की सिफारिश भी की थी l जब कि प्रारंभिक जाँच में तो यह घोटाला मामूली वित्त अनियमितताओं और हेराफेरी का मामला माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैस जांच की आँच बढ़ती गयी वैसे वैसे इस घोटाले से परत दर परत पर्दा उठता गया। पहले सौ, फिर दो सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर, अब अनुमान क़रीब तीन सौ करोड़ रुपये से भी ऊपर जा पहुंचा। दरअसल यह घोटाला मुआवजे की रकम का है। एनएच चौड़ीकरण में जो भूमि अधिग्रहित हुई, उसमें कृषि भूमि को अकृषि व व्यवसायिक आदि दिखाकर कई गुना अधिक मुआवजे का भुगतान लिया गया।


माना जा रहा है कि इस घोटाले की जाँच से सत्ता में काबिज़ कुछ सफेदपोशों के नाम उजागर होने की संभावना के चलते अब नर्म रुख़ अपनाया जा रहा है ज़नता को जाँच का रायता और खोकली बयानबाजी परोसकर घोटाले को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी चल रही है। सरकार जांच के नाम पर सिर्फ जनता को बरगलाने का काम कर रही है और अधिकारियों की आड़ में सफेदपोशों को बचाने में जुटी हुई है।क्या यही है सरकार का भ्रस्टाचार पर ज़ीरो टोलरेंस। क्या ऐसे होनी चाहिए घोटालों की जांच बंद?। क्या यही मोल है जनता के ख़ून पसीने की कमाई का ? क्या जो नेता-अधिकारी गलत काम करेंगे उन्हें उसका दंड नहीं मिलना चाहिए।



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