शरीर का बढ़ा हुआ तापमान हमेशा बुखार नहीं होता!

ज्यादातर लोग समझ नहीं पाते हैं कि 99 डिग्री फारेनहाइट बुखार है या नहीं। शरीर का तापमान बढ़ने से अक्सर हम चिंतित हो जाते हैं। बढ़े हुए तापमान को बुखार ही समझा जाता है। ऐसी स्थिति में लोग खुद ही बुखार की दवा भी ले लेते हैं। लेकिन अगर यह तापमान 99 डिग्री फारेनहाइट हो, तो असमंजस रहता है कि क्या करें? एक्सपर्ट्स का मानना है कि शरीर के तापमान में वृद्धि के कई कारण हो सकते हैं।
शरीर का तापमान अलग-अलग होता है
1868 में जर्मन फिजिशियन कार्ल रीनहोल्ड ऑगस्ट ने पाया था कि 98.6 शरीर का औसत तापमान होता है। अलग-अलग व्यक्ति के शरीर का तापमान अलग-अलग हो सकता है। दिन के अलग-अलग समय में भी शरीर का तापमान बदल सकता है। इसलिए, केवल तापमान बढ़ने को बुखार नहीं मानना चाहिए जब तक और कोई लक्षण न हो।

धर्मशिला नारायण अस्पताल के डा. शरांग सचदेव ने बताया कि शरीर का तापमान दिन में बदलता रहता है। यह सुबह के समय सबसे कम और दोपहर में थोड़ा बढ़ा हुआ रहता है। इसलिए यदि बुखार के और कोई लक्षण न हों, तो तापमान 99 डिग्री फारेनहाइट होने पर लोगों को परेशान नहीं होना चाहिए।
यह जानना जरूरी है कि 98.6 एक औसत है न कि पूर्ण तापमान है। बुजुर्गों के शरीर का सामान्य तापमान 98.6 से कम हो सकता है लेकिन, कामकाजी लोगों में ये अधिक हो सकता है। ज्यादा तापमान होने पर भी वे बिल्कुल स्वस्थ होते हैं। 2001 में जापान में हुई एक स्टडी के अनुसार व्यायाम, कसरत, गर्भावस्था और खाने के दौरान शरीर का तापमान बढ़ सकता है।
तापमान को किस तरह नापा जा रहा है इस बात से भी काफी फर्क पड़ता है। थरमॉमिटर को मुंह में रखा गया है या आर्मपिट में? क्या तापमान लेने से ठीक पहले आपने किसी ठंडी चीज का सेवन किया है? इस तरह के कारणों से तापमान में फर्क हो सकता है। बच्चों में 99.7 डिग्री फारेनहाइट ओरल टेम्परेचर को बुखार समझा जा सकता है। वयस्कों में भी अगर रेक्टल टेम्परेचर 99.7 है तो वो बुखार ही है। अगर बढ़े हुए तापमान के साथ सांस लेने में दिक्कत, शरीर में दर्द, पेशाब में जलन जैसी दिक्कतें हैं, तो आपको डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

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