चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस बार की हनुमान जयंती 19 अप्रैल शुक्रवार को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में होने से विशेष फलदाई होगी। कलिकाल में हनुमान जी की आराधना शीघ्र ही कामना पूर्ति करती है और इस पूजा में खानपान की शुद्धता,

नियम -संयम का विशेष ध्यान रखना होता है । विभिन्न लोग अपनी राषियों के अनंसार कामना पूर्ति के लिए हनुमान की आराधना करते हैं।
कहते हैं हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ करना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है। यही कारण है कि हनुमान जयंती के दिन लोग हनुमान मंदिरों में या फिर घर में मौजूद पूजा स्थल पर ही हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। वही कंई हनुमान भक्त इस दिन श्री रामचरित मानस के सुंदर कांड का पाठ भी करते हैं।
कहते हैं कि इस दिन पर मंदिर जाकर उनके चरणों में नारियल अर्पित कर सिंदूर का तिलक लगाकर इसे अपने व्यवसायिक स्थल पर रखने से व्यवसायिक स्थल का वास्तुदोष दूर होता है और व्यापार में वृद्धि भी होने लगती है।
हनुमान जी के बारे में कुछ बातें यह भी हैं कि –
मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी के जन्म का स्थान झारखंड के आंजन गांव में स्थिति एक गुफा में माना जाता है।
आंजन गांव में एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान हनुमान अपनी माता अंजना की गोद में बैठे दिखाई देते हैं।
मान्यता के अनुसार पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में वीर्य प्रविष्ट कर दिया। इसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से श्री हनुमान का जन्म हुआ।
हनुमान जी भगवान राम के अलावा माँ जगदम्बा के भी बहुत बड़े भक्त थे। इसलिये हर हनुमान मंदिर में माता जगदम्बा की प्रतिमा भी अवष्य होती है।
हनुमानजी ने रामायण वाल्मीकि से पहले ही लिख डाली थी जिसे बाद में उन्होंने समुद्र में फेंक दिया था।
ऐसी मान्यता भी है कि हनुमानजी आज भी जीवित है और कलयुग के समाप्ति तक इस पृथ्वी पर रहेंगे।
हनुमान जी को सभी ब्रह्मचारी के रूप में जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका मकरध्वज नाम का एक बेटा भी था।
यह भी कहा जाता है कि दरअसल जब हनुमान जी सूर्यदेव से शिक्षा प्राप्त कर रहे थे तब एक विद्या को प्राप्त करने के लिए वैवाहिक होना जरूरी था। इस शर्त को पूरा करने के लिए सूर्यदेव ने अपनी पुत्री का विवाह हनुमानजी से कर दिया था।

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