गैरसैंण के मुद्दे पर चिट्ठी अभियान शुरु करेगी पर्वतीय विकास पार्टी 

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गैरसैंण के मुद्दे पर चिट्ठी अभियान शुरु करेगी पर्वतीय विकास पार्टी 

देहरादून: उत्तराखंड पर्वतीय विकास पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष विजय कुमार बौड़ाई ने कहा है कि पार्टी को व्यापक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए सदस्यता अभियान चलाया जायेगा। पलायन रोकने के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जायेगा और गैरसैंण को प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाये जाने के लिए चिट्ठी अभियान की शुरूआत की जायेगी।

देहरादून के एक रेस्टोरेंट में पत्रकारवार्ता को संबोधित कर पार्टी की घोषणा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत मे विजय कुमार बौडाई ने कहा है कि गिरीश चन्द ईस्टवाल व नारदा नंद बलूनी को संरक्षक, एस डी पंत को संयोजक, प्रहलाद सिंह बिष्ट को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, गिरीश चन्द्र मैन्दोला को उपाध्यक्ष, जगमोहन सिंह असवाल को महासचिव, मनोज कुमार मिश्रा को सचिव, दुरेन्द्र सिंह रावत को कोषाध्यक्ष, कैलाश चन्द्र जोशी को मीडिया प्रभारी, रतन सिंह राणा को सह मीडिया प्रभारी, संदीप ढौडियाल व जितेन्द्र डंगवाल को संगठन मंत्री बनाया गया है। उनका कहना है कि राज्य का निर्माण विशेष रूप से पहाडों के विकास एवं सुदूर क्षेत्र तक जरूरी सुविधाओं को जन जन तक पहुचाने के उद्देश्य से हुआ। उत्तराखण्ड की जनता के कडे संघर्ष के परिणाम स्वरूप राज्य प्राप्ति हुई है। राज्य का निर्माण होने से समस्त उत्तराखण्ड वासी बहुत प्रसन्न थे तथा उन्हे विश्वास हो चला था कि जो विकास उत्तर प्रदेश मे रहने के दौरान नही हो पाया था वह अब उत्तराखण्ड राज्य बनने के उपरान्त हो जायेगा किन्तु जनप्रतिनिधियों की अदूरदर्शिता एवं प्रतिबद्धता की कमी तथा दोनांे प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की उदासीनता के कारण राज्य की जनता को जो प्राप्त होना चाहिये था वह नही हो सका।

उनका कहना है कि पहाड़ से पलायन एक गम्भीर समस्या बन गयी है। बढती बेरोजगारी, ससाधनों की लूट, भ्रष्टाचार युक्त राजनीतिक अराजकता, विकास के नाम पर लूट, राजनेताओं एवं नौकरशाही का गठजोड राज्य के लिये अभिषाप बन चुकी है। इससे अधिक दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति और क्या होगी कि एक राज्य 17 वर्षो से अपनी स्थाई राजधानी तय नहीं कर पाया है। राज्य के निर्माण को लगभग 18 वर्ष पूर्ण होने जा रहे है किन्तु राज्य के निर्माण के इतने वर्षो बाद भी आज राज्य की वह स्थिति नही है जिसकी कल्पना राज्य स्थापना के समय की गयी थी। सत्ता मे चाहे भाजपा रही हो या कांग्रेस, किसी भी पार्टी ने पर्वतीय राज्य की अवधारणा को साकार करने के लिये ईमानदार कोशिश नहीं की गई। मुद्दा चाहे रोजगार का हों, पहाडो पर बुनियादी जरूरतों का हो, भ्रष्टाचार का हो, पलायन का हो, गैरसैण राजधानी का हो, प्रमुख राजनीतिक दलांे की सरकारों की मन्शा साफ नही दिखायी दी। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का आखिल भारतीय स्वरूप होने के कारण उत्तरखण्ड जैसा राज्य उनके लिये कोई महत्व नही रखता है। जिस कारण दोनो प्रमुख पार्टियां उत्तराखण्ड के प्रति उदासीन रहती है। इसी उद्दंेश्य से हमने उत्तराखण्ड पर्वतीय विकास पार्टी का गठन किया । प्रदेश के लिये पार्टी एक दूरगामी विकास की नीति  बनायेगी। पर्यटन एव पर्यावरण संरक्षण, कृषि, बागवानी एवं उद्यान, पशुपालन, जल, जमीन एवं जगंल, पहाडी क्षेत्रों मे भी लधु उद्योगों की स्थापना, आदि महत्वपूर्ण विषयों के लिये पार्टी ठोस नीति तैयार करेगी जिससें उत्तराखण्ड प्रदेष का समग्र विकास हो सकेगा। राज्य में यह एक सशक्त विकल्प देने तथा प्रदेश का परिदृश्य बदलने व उत्तराखण्ड के राजनीतिक पटल पर एक नयी राजनीतिक सम्भावना को खडा करने का प्रयास किया है। गैरसैण को राज्य की स्थाई राजधानी बनायेगी व उसके निर्माण के लिये जनता के बीच मंे जायेगी व जनता के सहयोग से इस कार्य को पूर्ण करेगी। पार्टी राज्य के प्रत्येक व्यक्ति से अनुरोध करेगी कि वह प्रधानमंत्री को राज्य की राजधानी गैरसैंण बनाने तथा केदार नगरी की भांति गैरसैंण नगरी को विकसित करने के लिये चिट्ठी भेज कर आग्रह करें। इस अवसर पर वार्ता में गिरीश चन्द ईस्टवाल, नारदा नंद बलूनी, एस डी पंत, प्रहलाद सिंह बिष्ट ,गिरीश चन्द्र मैन्दोला, जगमोहन सिंह असवाल, मनोज कुमार मिश्रा, दुरेन्द्र सिंह रावत, कैलाश चन्द्र जोशी, रतन सिंह राणा, संदीप ढौडियाल व जितेन्द्र डंगवाल आदि मौजूद थे।

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