लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान  महागठबंधन के बारे में पहले ही ऐलान हो गया था कि चुनाव के बाद यह गठबंधन टूटने लगेगा, और लगता है शायद ऐसा हो भी रहा है। इसके संकेत सबसे पहले मुलायम सिंह यादव ने सपा नेताओं के साथ मीटिंग में दे दिए थे, और अब नए संकेत बसपा प्रमुख मायावती की ओर से आने लगे हैं सोमवार यानी 3 जून को बसपा के सांसदों और जिलाध्यक्षों के साथ मायावती ने बैठक की। मायावती ने इस बैठक में कहा है कि उन्हें सपा के साथ गठबंधन से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। मायावती ने यह भी कहा कि वे गठबंधन की समीक्षा करेंगी।

  मौजूदा समय में यूपी विधानसभा की 11 सीटें खाली हैं। इन सीटों के विधायक इस साल लोकसभा चुनाव लड़कर सांसद चुन लिए गए हैं। मायावती ने यूपी की इन 11 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनावों पर अकेले लड़ने के संकेत भी दिए.बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि 50 फीसद वोट पाने का लक्ष्य लेकर हमें राजनीति करनी है। लोकसभा चुनाव के दौरान सपा और बसपा के वोटो के एक दूसरे को ट्रांसफ़र होने पर चर्चाएं होती रही थीं। यादव वोटों के बाबत मायावती ने मीटिंग में कहा कि अपेक्षा के अनुरूप यादव वोट बसपा के प्रत्याशियों को ट्रांसफ़र नहीं हुए.शिवपाल यादव पर मायावती ने भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। मायावती ने कहा कि शिवपाल यादव ने भाजपा को वोट ट्रांसफ़र कराए, और समाजवादी पार्टी इसे रोक नहीं पाई।

आज़मगढ़ की दीदारगंज विधानसभा से बसपा विधायक सुखदेव राजभर भी बोल पड़े- 

“संगठन का ढांचा बहिनजी ने बदल दिया है। पार्टी की कई सारी कमेटियों को बहनजी ने भंग कर दिया है। मायावती जी ने टिप्पणी की कि गठबंधन के बावजूद जिस नतीजे की अपेक्षा थी वह नहीं हुई।”

         सुखदेव राजभर ने यह भी कहा कि मायावती जी ने चिंता जताई कि अखिलेश यादव के परिवार की तीन सीटें हारने के पीछे शिवपाल यादव बड़ी वजह रहे हैं। गठबंधन टूटने के सवाल पर राजभर ने कहा कि ये तो पार्टी के बड़े नेता बताएंगे कि गठबंधन रहेगा या टूटेगा। लेकिन पार्टी विधानसभा उपचुनाव लड़ेगी। मीडिया में खबरें आई हैं कि बीते हफ्ते सपा नेताओं के साथ हुई मीटिंग में भी मुलायम सिंह यादव ने आधी सीटें बसपा को देने पर सवाल उठाया था। मुलायम ने शिवपाल को पार्टी से अलग करने पर भी आपत्ति जताई थी।

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