डस्टबीन से लेकर स्ट्रीट लाइटों की खरीद में चल रहा है लाखों का घोटाला

देहरादून-  नगर निगम में घोटालों और उनकी जांच को ठिकाने लगाने वाले मामलों की लिस्ट बड़ी लम्बी हो गयी है। यहाँ कूडेदानों से लेकर स्ट्रीट लाइटों तक की खरीद में भी बहुत बड़े .बड़े घोटाले हुए हैं। इन दो बड़े घोटालों की जांच को ठिकाने लगाने में निगम के कार्मिकों ने कोई भी कसर नहीं छोड़ी है। सोडियम घोटाले की जांच की रिपोर्ट तो विजिलेंस तक को सौंप दी गयी थीए लेकिन निगम की तरफ से विजिलेंस को दस्तावेज पूर्ण रूप से नहीं दिये गये।

सोडियम लाईट के घोटाले की जांच के लिए नहीं दिए विजिलेंस को पूरे कागजात

                वर्ष 2012 में शहर की स्ट्रीट पोल पर लगने वाली सोडियम लाईट की खरीद की गयी थीए फिर बात उठी की इन लाइटों की खरीद बाजारू मूल्यों से अधिक मूल्य पर हुई है। धीरे धीरे मामला तेजी पकड़ने लगा और कई बैठकें भी इस चक्कर में हंगामे की भेंट चढ़ी और हद तो तब पार हो गयी जब लाइटों की गुणवत्ता भी घटिया पाई गयी। इसके बाद निगम ने विभागीय जांच करवाई लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकल पाया। इसका शासन ने संज्ञान लेते हुए वर्ष 2013 में जांच विजिलेंस को सौंप दी। पिछले 6 सालों से विजिलेंस इस मामले में दस्तावेजों की मांग कर रही है लेकिन निगम के कानों में जूं तक नहीं पड़ी। ठीक इसी तरह वर्ष 2015 में निगम की तरफ से 130 छोटे.बड़े कूड़ेदान खरीदे गये तथा इस प्रक्रिया के लिए लुधियाना की एक एजेंसी को माल पहुँचने से पहले ही पूरा भुगतान किया जा चुका था।
                ठीक 30 लाख के भुगतान के बाद यह मामला भी गर्मी में आ गया और निगम ने दुबारा से विभागीय जांच बैठा दी। लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला। अब तक ना ही जांच पूरी हो पायी है और ना ही निगम ने इस कार्य के लिए किसी कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराया है। ऐसा ही चलता रहा तो निगम पूरे जिले की धनराशी को डकार जाएगा और किसी को भनक तक नहीं लगेगी।

सोचिये जब राजधानी के ही ये हाल हैं तो उत्तराखंड के और राज्यों का क्या हाल होगा…..

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