दिव्यांग प्रेरणा यात्रा 2017 नौटियाल कृत्रिम अंग कल्याण समिति देहरादून द्वारा प्रेसमिर्ची एक्सक्लूसिव




 हिमांशु पैन्यूली

प्रेसमिर्ची एक्सक्लूसिव केदारनाथ यात्रा 2017 विगत तारिक़ 1मई 2017 दिव्यांग जनों संग विश्वव्यापी विख्यात केदारनाथ यात्रा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बिभिन्न कारणों से शारीरिक रूप से अयोग्य हुए व्यक्तियों द्वारा 28 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा को प्रत्यक्ष जीने का अवसर डॉ नौटियाल {नौटियाल कृत्रिम अंग कल्याण समिति देहरादून} के सौजन्य से प्राप्त हुआ। डॉ नौटियाल जो शारीरिक रूप से अयोग्य व्यक्तियों का इलाज़ कृतिम अंग लगा कर उनको मानसिक और शारिरिक तौर पर आगामी जिंदगी बिना किसी सहारे के जीने और उन्हें मानशिक और शारीरिक तौर पर सक्षम करते है।
केदारनाथ यात्रा हिन्दू धर्म में एक प्रख्यात देवयात्रा है जो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले के पहाड़ों की बेहद कठिन ऊंचाइयों में बसे बाबा केदार जिन्हें भगवन शिव के अवतार में सर्वोपरि भी माना जाता है।डॉ नौटियाल द्वारा दिव्यांगजनों के उत्साहवर्धन के लिये विगत वर्षो की भांति इस बार 1 मई 2017 से 4 मई 2017 तक ’’दिव्यांगजन प्रेरणा 2017’’ के बैनर तले इस यात्रा का शुभारंभ किया गया था इस साहसिक मिशन में कृत्रिम पांव की सहायता से गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम (21 कि0मी0) व केदारनाथ धाम से वापस गौरीकुण्ड (21 कि0मी0) कुल 42 किमी0 की दुर्गम चढाई एवं उतरना शामिल था। दिव्यांग प्रेरणा 2017 के बैनर तले 14 सदस्यों के इस दल को हरी झंडी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा गढ़ीकैंट स्तिथ आवास देहरादून से दिनांक 1 मई 2017 को दी गयी।गौरतलब है कि इस प्रेरणा यात्रा में 5 दिव्यांग सदस्य भी शामिल है जो भिभिन्न हादसों में अपनी एक टांग गवां बैठे थे।

यात्रा में 5 दिव्यांगजनो के अलावा 9 और सदस्यों द्वारा प्रतिभाग किया गया, यह यात्रा उन शारीरिक रूप से विकलांग हुए लोगो के लिए एक प्रेरणा श्रोत है जो बिभिन्न कारणों से अपने शारीर के किसी अंग से लाचार हो गये है लेकिन कहते है न उड़ान सिर्फ़ पंखों से ही नहीं हौंसलों से भी की जाती है जिसका उदाहरण डॉ नौटियाल की इस यात्रा में जीवंत होता प्रतीत होता है।



गौरतलब है कि डॉ नौटियाल द्वारा  पिछले तीन वर्षों से दिव्यांगजनों को एक्सपीटिशन करने का बीडा उठाया है। इससे पहले भी ख़ुद पूरा आर्थिक संसाधन जुटाकर डा0 नौटियाल कई दिव्यांगजनों को हेमकुण्ड व केदारनाथ के साहसिक मिशन पर ले जा चुके हैं। डा0 नौटियाल की मानें तो दिव्यांगजनों में भी एक्सपीडिशन की ललक बेहद हुआ करती है। लेकिन संसाधन के अभाव में वे लोग यात्रा नही कर पाते हैं। दिव्यांगजनों के लिए इस साहसिक मिशन को इस वर्ष ’’दिव्यांगजन प्रेरणा 2017’’ नाम दिया गया है तथा इस मिशन की पंचलाईन ’’मानसिक दृढता से शारीरिक निशक्तता पर विजय’’ से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि यदि दिव्यांगजन मानिसक रूप से मजबूत होंगे तो वो ’’शारीरिक निशक्तता’’ को पीछे छोड सामान्य व्यक्ति से भी बेहतर करने की क्षमता रखते हैं।




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