दिव्यांगजनों के कृतिम अंग व उपकरणों को जी.एस.टी के दायरे से बाहर करे सरकार : डॉ विजय कुमार नौटियाल

Dr V.K Nautiyal meets Honourable Speaker Uttarakhand Vidhansabha P.C Aggarwal

हिमांशु पैन्यूली

देहरादून,8जून: शारीरिक रूप से अयोग्य व्यक्तियों का इलाज़ कृतिम अंग लगा कर उनको मानसिक और शारिरिक तौर पर आगामी जिंदगी बिना किसी सहारे के जीने और उन्हें मानशिक और शारीरिक तौर पर सक्षम कर “नौटियाल कृतिम अंग केंद्र” के संस्थापक डॉ विजय कुमार नौटियाल ने दिव्यांगजनों के उपकरणों और कृतिम अंगों, व्हीलचेयर और कैलिपर आदि को GST के दायरे से मुक्त करने हेतु आज विधानसभा अध्य्क्ष श्री प्रेमचंद अग्रवाल से विधानसभा देहरादून में मुलाक़ात कर माननीय विस अध्य्क्ष को दिव्यांगजनों के इलाज़ में उपयोगी उपकरणों जैसे कृतिम अंग, व्हील चेयर, कैलिपर आदि में लगने वाले GST से अवगत कराया।




डॉ नौटियाल ने कहा कि जहां एक तरफ़ सरकार द्वारा समय समय पर दिव्यंजनो की सहूलियत के लिए कैम्प आदि के माध्यम से दिव्यांगजनों के हित की योजनाओं के बारे में प्रचार व प्रसार पर सरकार द्वारा ही खर्च किया जाता है वहीं दिव्यांगजनों के उपयोग में लाये जाने वाले उपकरणों, कृतिम अंगों आदि पर  केंद्र सरकार ने 5 से 12 प्रतिसत GST लगाया गया है जो कि बिल्कुल भी उचित नहीं है यदि इस क्षेत्र में काम कर रहे जानकारों की मानें तो भारत में उपरोक्त उपकरणों का  क्रय-विक्रय मार्केट लगभग 300 करोड़ का है जिसमें से 70से 80 प्रतिसत भारत सरकार अनेको कार्यो के माध्यम से खर्च करती है तथा शेष 80 से 100 करोड़ प्रॉस्थेटिस्ट और ओर्थोटिस्ट प्रोफेसनल के जरिये दिव्यांग जन एवं दिव्यंजनो के उपकरणों  के लिए क्रय विक्रय होता है, साथ ही जानकारों का यह भी मानना है कि यदि सरकार 100 करोड़ पर 5 प्रतिसत से 12 प्रतिसत तक GST ले रही है तो सरकार का राजस्व लगभग 6 से 8 करोड़ होगा। जिसमें कुछ स्वाभिमानी दिव्यांगजन  खुद ही वहन करना चाहते है, किसी भी प्रकार से सरकार पर बोझ नहीं बनना चाहते है ऐसे दिव्यांगों के लिए सरकार का यह कदम उन स्वाभिमानी दिव्यांगजनों के मनोबल कमजोर करने जैसा होगा और ऐसा कर के सीधे ही सरकार की तरफ से उन स्वाभिमानी दिव्यांगजनों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वैसे ही दिव्यांगजनों को सरकार और सामंज में हीन भावना से देखा जाता है और तो और उनके स्वयं के परिवार के सदस्यों द्वारा भी दिव्यांगजनों को अपने ऊपर बोझ समझा जाता है यदि कोई दिव्यांग अपनी आत्मसम्मान के तहत सरकार के ऊपर किसी भी प्रकार से कृतिमअंग या उपकरणों के लिए निर्भर नही रहना चाहता, तो उन स्वाभिमानी दिव्यांगजनों के लिए सरकार द्वारा लगाया GST उनके इस स्वाभिमानी मनोबल को दबाने का काम करता है।  इसलिए दिव्यांजनों के लिए समर्पित संस्था ‘नौटियाल कृतिम अंग केंद्र’ द्वारा आज उत्तराखंड के विधानसभा अध्य्क्ष  प्रेम चंद अग्रवाल को एक पत्र देकर इस विषय पर कोई सकारात्मक कर्यवाही करने का आग्रह किया है।जहां एक ओर  भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगजनों के के हित के लिए समूचे भारत वर्ष में कई कल्याणकारी  योजनाओं की शुरुवात भी की है वहीं ऐसे में अगर स्वाभिमानी दिव्यांगजनों को GST के दायरे से मुक्त कर दिया जाय तो यह भारत में  रह रहे  दिव्यांगजनों के लिए ख़ुशी की बात होगी।




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