सूर्यास्त पहाड़ मस्त

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सूर्यास्त पहाड़ मस्त

हिमांशु पैन्यूली

जी हाँ ! आज़ तक ये कहावत  सिर्फ़ हम हास्य व्यंग्य के रूप में ही सुनते थे लेक़िन उत्तराखंड सरकार अब इस कहावत को सच करने का मन बना चुकी है प्रदेश सरकार का यह दमनकारी निर्णेय जिसमें देवप्रयाग के ग्राम डडुवा और भंडाली में दिल्ली की एक प्राइवेट फर्म शराब की फैक्ट्री लगाने की योजना बना रही है।

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र जहाँ एक ओर मूलभूत सुविधाओं के आभाव एवं मौजूदा सुविधाओं की बदहाली से जूझ रहे है। स्वस्थ्य,शिक्षा और बेरोजग़ारी जैसी समस्या के चलते पहाड़ से पलायन कर रहे है।जिसके बावजूद भी सरकार के पलायन रोकने के दावे सिर्फ़ भाषणों तक ही सिमटे नज़र आ रहे है सरकार द्वारा भाँति भाँति की योजनाओं/परियोजनाओं को स्वीकृति तो दे दी जाती है लेकिन उसके बाद उससे पहाड़ के जनमानस को कितना फ़ायदा मिल रहा है उसकी वास्तविक स्थिति भी किसी से छुपी नहीं है।

वहीँ अग़र बात करें पहाड़ों में बढ़ती नशे की ख़पत की तो चाहे युवा हो या वृद्ध सब नशे की चपेट में इस कदर है कि अपनी ही जान माल के दुश्मन बन बैठे है।नशे की बढ़ती लत के कारण ना जानें  कितने ही परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। ऐसे में सरकार का यूँ पहाड़ में शराब का कारख़ाना लगाने का प्रयास पहाड़ के लिए एक अभिशाप के तौर पर उभर कर सामने आयेगा।

जहाँ एक ओर बिहार जैसे राज्य ने शराब पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया है और वहीँ और भी दूसरे राज्य इस पर विचार कर रहे है ऐसे में यूँ उत्तराखंड सरकार द्वारा यहाँ शराब की फैक्ट्री लगाने की योजना पर अमल करना बेहद ही निंदनीय निर्णेय हैं। जिससे पहाड़ की स्तिथि और भी बद से बद्तर हो जाएगी।

आपको यह भी बता दें कि प्रदेश सरकार के इस निर्णय पर मैती स्वयं सेवी संस्था के बैनर तले संस्था के सदस्यों ने गुरुवार को एसडीएम कार्यालय ऋषिकेश में प्रदेश सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ नारेबाजी कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।जिसमें संस्था की अध्यक्ष कुसुम जोशी ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि देवप्रयाग के ग्राम डडुवा और भंडाली में दिल्ली की एक प्राइवेट फर्म शराब की फैक्ट्री लगवाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि संस्था सरकार की इस योजना का विरोध करती है।  प्रदेश के गांवों में वैसे ही शराब को लेकर हालात अच्छे नहीं हैं।
आज गांव के लोगों को रोजगार की जरूरत है। ऐसे में सरकार की इस योजना से पहाड़ के गांव में शराब की फैक्ट्री लगने से गांव के हालात और भयावह हो जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से सरकार के इस  निर्णय को बदलने की मांग की। और साथ ही साथ उन्होंने सरकार को चेताया भी है कि यदि सरकार इस योजना को तत्काल वापस नहीं लेती है तो पूरे प्रदेश मे आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में बीना बिष्ट, सुषमा राणा, बैजंती नेगी, वंदना, विमला, कमला नेगी, शोभा चौहान, लक्ष्मण सिंह धर्मशक्तु, शुभम जोशी, राम रतन रतूड़ी आदि शामिल रहे।

2 COMMENTS

  1. बहुत सही िलखा है आपने
    सरकार पॉलिथीन इस्तेमाल पर तो 500का
    जुर्माना लगाती है जिसकी हानि हमें होगी पर कुछ समय बाद परंतु जिस तरह पॉलीथीन हमारे पयर्ा वरण हमे नुकसान करेगी उस तरह शराब
    हमारे समाज को हानि पहुँचाएगी ा

    हो सरकार के पास तो यह जवाब दे
    एक तरफ शिक्शा अौर किताब दे
    दूसरी तरफ शराब के अड्डों को अनुमति जनाब दे
    tv में दिखाते हानिकारक यह शराब है
    सेहत के लिए यह खराब है
    कितने परिवार बिखरते इससे क्या सरकार के पास हिसाब है?

    (govt. jgah jgah yh kanoon bnati h yha smoke /drink krne pr jurmana h but bnane vale ko hi rok diya jay agr to n milne pr koi nhi use kr skta.jis trah govt ne 25pc,50pese bnd kiy to ab vo khi dekhne ko nhi milte is trah shrab b nhi dikhegi.but govt nhi kregi kyunki isse uska fayda

    • सरकार सिर्फ़ और सिर्फ़ राजस्व बढ़ाने पर ज़ोर रखती चाहे फ़िर बात पहाड़ में शराब का कारख़ाना लगाना पड़े या फ़िर मैदानी क्षेत्रो मे खनन करवाना

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