छीन लिया बचपन शोषण ने

शोषण एक ऐसा शब्द जिसके अर्थ से हम सब वाकिफ़ हैं, जिसे सुनते ही हमारे कानो में चुभन और शरीर में रौंगटे खड़े हो उठते हैं।  बचपन जिंदगी का सबसे प्यारा और खुशनुमा दौर जिसे इंसान बार-बार जीना चाहता हैं। आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में आप इतने व्यस्त हो चुके है कि आपके पास अपने बच्चों को देने के लिए वक़्त ही नहीं।  ऐसे में आप अपने बच्चों को छोड़ जाते है किसी आया या रिश्तेदार के भरोसे।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 100 प्रतिशत में से 90 प्रतिशत शोषण के ऐसे मामले सामने आये है जिनमे से शोषण करने वाला आप ही का कोई अपना यानी की आप ही के परिवार-जनो मे से कोई होता है| बच्चे छोटे है उन्हें सही गलत की पहचान नहीं, उन मासूम कलियों को ये तक नहीं पता होता की उनके साथ जो हो रहा है या हो चुका है वो गलत है, अजिब तो लगता हैं उन्हें पर समझ नहीं पाते ओर जो थोड़ा बहुत समझकर अपने माता-पिता को बताना चाहते हैं वो बताने मे असमर्थ हो जाते है।  कारण -उन्हें डरा-धमकाकर चुप करा दिया जाता है उस पल उनके दिल से सिर्फ एक पुकार निकलती है:-
माँ क्यों छोड़ गयी तू मुझे,
   इस काले साये से डर लगता
                            माँ  है मूझे। 
ना जाने क्या सह जाता हूँ
                                उस पल, 

   जिस पल तू नहीं होती।

     शिकार हुए बच्चे इस डर के कारण अपनी जिंदगी मे दब-दबे और गुमसुम से हो जाते है जिस उम्र में उन्हें खेलना-कूदना और थोड़ी बहुत पढ़ाई-लिखाई सिखाई जाती है उस उम्र मे वो इतना कुछ देख ओर सह जाते है,जो उनका मासूम बचपन तबाह करके रख देता है यही नहीं, वक़्त बीतने के साथ शरीर से निशान तो मिट जाते है परंतु आत्मा पर पड़ी वो गहरी चोट कभी नहीं कुछ अपनी युवा उम्र में आने पर अपने माता-पिता को बताने मे सक्षम हो पाते है और अपनी जिंदगी को आगे बढ़ा पाते है तो वही कुछ ना बताकर उस काले साए से उम्र भर डरते रहते हैलेकिन जो बता पाते है वो भी अपनी जिंदगी मे उस इंसान को देखकर अपने न्याय की पुकार करते है पर कुछ भी तथ्य ना होने के कारण कुछ कर नहीं पाते आखिर इन सब में गलती किसकी थी “माँ-बाप” की या “जिसने शोषण किया” ?????

      अगर इस बारें में सोच विचार कर कोई परिणाम निकाला जाएँ तो जवाब होगा जितना दोष शोषण करने वाले का है उतना ही माँ-बाप का भी|
       आप पैसा किसके लिए कमा रहे है ? किसके लिये इतनी मेहनत भाग-दौड़ करते है आखिर किसके लिये “अपने बच्चों के लिए उनके उज्जवल भविष्य के लिए” पर अगर वे ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो क्या करोगे आप ऐसे पैसे का , अपने  दिल के टुकड़े को औरों के भरोसे छोड़ने की बजाए आप उन्हें अपना कीमती वक़्त दीजिये जो कही ज्यादा महत्वपूण है
   साथ तेरा अब ना छोड़ेगे हम,
   साया तुझ पर कोई आने
                                   ना देंगे।
        जन्मदाता है तेरे ,
   तुझे कुछ होने नहीं देंगे।
तेरी माँ

मिनाक्षी ठाकुर

बी.ए मॉस कम्युनिकेशन

16 Comments

  1. Nice article and great thinking

  2. Awesome article
    Everything written is real bitter truth.

  3. bhot khub kha mini ….this is the bitter truth of our society …first people knowingly do mistakes and after that they blame others for their very own blunders …keep going meenakshi

  4. Vry nyc minu, keep going :*

  5. vry nce post …bcz most of people fr their benifit,exploited little child,they nevr think evr,he has also a child at their home,those are waiting. . .so above all lines are vry truth,u r quite little bt your thought are vry huge. . . .keep it up. .
    All d bst.

  6. Me feeling proud to you

  7. great article ….. people should aware of this .

  8. ur article is the mirror of our society…

    good job mini

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