बदहाल हालत में दून की सड़कें

बदहाल हालत में दून की सड़कें
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राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून जो अपने प्राकृतिक और स्वछ वातावरण के लिए देशभर में कभी मशहूर हुआ करती थी आज वही प्रदूषण से लेकर सडको की खराब हालत में तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। जहाँ देखो सड़के टूटी-फूटी या गड्डे खोदे हुए होते है। काम चले या न चले उन्हें समय से ठीक नहीं किया जाता लिहाजा इसके परिणाम आम जनता को भोगने पड़ते है। ज्यादातर दून की सड़कों की हालत खस्ता है। लेकिन कुछ सड़कों का खास ख्याल रखा जाता है, क्योंकि इन सड़कों से खास लोग गुज़रते है। इस बात का अंतर दिलाराम चौक से मुख्यमंत्री आवास तक जाती चकाचक सड़क और दूसरी ही और डी.ए.वी कॉलेज से करनपुर होते सर्वे चौक निकलती सड़क से आसानी से समझा जा सकता है। केवल एक गली का फासला जब इतना खस्ता है तो बाकी सड़कों का हाल क्या है अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं होगा। सड़क के गद्दों को ठीक करने की बजाए उन्हें मिट्टी से भर दिया जाता है जिससे आम जनता की परेशानी और बढ़ चुकी है। जैसे ही कोई बड़ा नेता-राजनेता दून आने को होते है तो रातों रात काफी सड़कों को ऐसे चमका दिया जाता है मानो वहाँ कभी कोई गड्डा हो ही न या सड़क टूटी ही न हो। इसका जीता-जागता उदाहरण हमे तब ही मिल गया था जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 2016 में देहरादून पधारे। आखिर कब तक आम जनता को बेवकूफ बनाया जायेगा, जो काम राजनेताओं के आने पर हो सकते है वे समय रहते क्यों नहीं होते?? आम जनता हर रोज़ अपने काम के लिए इन्हीं रास्तों से होकर जाती है सफर तय करने में हर रोज़ न जाने कितने कष्ट भोगती होगी। राजनेता एक या दो दिन के लिए इन रास्तों से गुजरते है जब उनके लिए अच्छे इंतज़ाम किये जा सकते है तो उस जनता के लिए क्यों नहीं जो इन राजनेताओं को इतने बड़े पद तक पहुँचाते है।
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मीनाक्षी ठाकुर
बी.ए (मास कॉम)
देहरादून

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