“उतराखंड राज्य की उपलब्धियां एवं चुनौतियां”

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“उतराखंड राज्य की उपलब्धियां एवं चुनौतियां”

उतराखंड को यूपी से अलग हुए 15 साल पूरे हो गए हैं। इन 15 सालों में जहां एक ओर उतराखंड को कई उपलब्धियां मिली। वहीं दूसरी ओर प्रदेश् को कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ा है।

राज्य की उपलब्धियां की बात करें तो :-

राज्य के गठन के समय विकास का दर 19 प्रतिशत करीब थी, जो वर्तमान समय दस प्रतिशत से उपर है। हालांकि एक समय वह 18 प्रतिश्त के करीब भी पहुंची थी।

गठन के साथ ही राज्य में करीब 35 हजार करोड़ का पूंजी निवेश् हुआ था। 15 सालों में औधोगिक  क्षेत्र में विकास हुआ है। पूंजी निवेश् में लगातार इजाफ़ा हुआ है, हालांकि शुरुवाती दौर में रफ़्तार कम ज़रूर दिखाई पड़ी  ।

जीईपी की पहल करने वाला पहला राज्य उतराखंड सकल पर्यावरणीय उत्पाद हेतु  विकास का मानक बनाने को लेकर राज्य ने घोषणा कर देश् में इसकी पहल की। ऐसी स्थिति में विकास एवं संसाधनों की मदद मिलती है।

एजुकेशन की बनी पहचान
15 सालों में राज्य ने एजुकेशन के रूप में पहचान और मजबूती दी। नए विष्वविद्यालय खुले एवं साथ ही नए-पुराने स्कूलों में बढ़ोतरी हुई है। जिससे राज्य की साक्षरता में इजाफा हुआ है। साक्षरता दर महिलाओं और पुरुषों  दोनों में बढ़ी है। साक्षरता दर करीब 80 प्रतिश्त तक पहुंच गई है। उर्जा के क्षेत्र में राज्य में पिछले 15 सालों में गांवों में बिजली के तार बिछाने का काम लगभग पूरा है।

राज्य के समक्ष चुनौतियां

आपदा प्रबंधन एवं पुननिर्माण, उतराखंड राज्य के पर्वतीय जनपदों में प्राकृतिक आपदा का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ है जोथमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कुछ विगत वर्षों  में देखें तो प्राकृतिक आपदा बड़ी समस्या बनता दिख रहा है, जून 2013 में आई त्रासदी ने पहाड़ों को झकझोर कर दिया है,पहाड़ों के लोग आज भी 2013 में आयी माह प्रलय से ख़ुद को बहार  निकालने की क़वायद में जुटे हुए हैं।

पलायन से वीरान होते पहाड़ पर्वतीय प्रदेश् का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि पहाड़ों से रोजी-रोटी की तलाश् में वहां की आबादी बड़ी संख्या में मैदानों और दूसरे राज्यों में पलायन करती जा रही है। संसाधनों और विकास के अभाव से पहाड़ी जनपद लगभग ख़ाली होने की कगार पर है।
अगर हम बात करे युवाओं को रोजगार के अवसर की, तो राज्य में रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए अब तक न तो कोई ठोस नीति बनी न ही इस दिशा में पर्याप्त प्रयास हुए। राज्य में लगलभ 8 लाख पंजीकृत बेरोगार है। बेरोजगारी दर राज्य में लगभग 5 फीसदी है, लेकिन ये संख्या लगातार बढ़ रही है।

औधोगिक विकास को गति देना राज्य में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन, हायर एजुकेश्न, आईटी आदि अपार संभावनाएं है। इस क्षेत्रों के लिए सरकार ने सिडकुल वन की शुरुवात तो कि है पर साथ ही सड़क,रेल मार्ग विकसित करना बाकि है।

बार्डर एरिया में सुधार
राज्य की लंबी सीमा चीन और नेपाल से जुड़ी हुई है। इस सीमा के साथ लगे क्षेत्रों को   मूलभूत सुविधा संपन बनाने की जरूरत है या कहें विकास की ओर बढ़ावा देने की ज़रुरत है।

आशीष सिंह चैहान
 बी.ए मास काॅम