डब्ल्यूआइसी इंडिया में दो दिवसीय 7वां पंडित विदुर मल्लिक संगीत समारोह आरम्भ

डब्ल्यूआईसी का मुख्य उद्देश्य ध्रुपद संगीत और उत्तराखंड में भारतीयशास्त्रीय संगीत के विभिन्न रूपों व दुनिया के बेहतरीन कला रूपों को बढ़ावा देना है :- नाज़िया यूसुफ इजुइद्दीन
24 फरवरी, देहरादून –  राजपूर रोड स्थित डब्ल्यूआइसी इंडिया में दो दिवसीय 7वें पंडित विदुर मल्लिक संगीत समारोह के पहले दिन का शानदार आयोजन किया गया। ध्रुपद सम्राट पंडित विदुर मल्लिक की स्मृति में दो दिवसीय संगीत संध्या आयोजित की गयी है। 
दो दिवसीय आयोजन के बारे में डब्ल्यूआइसी इंडिया की प्रेज़ीडेंट नाजिया यूसुफ इजुइद्दीन ने कहा कि, पंडित विदुर मल्लिक धु्रपद अकादमी इलाहबाद के सहयोग से डब्ल्यूआइसी इंडिया देहरादून में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। पिछले 3 वर्षों से हम संयुक्त रूप से भारतीय शास्त्रीय संगीत को विरासत बनाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित कर रहे हंै। डब्ल्यूआईसी का मुख्य उद्देश्य ध्रुपद संगीत और उत्तराखंड में भारतीय शास्त्रीय संगीत के विभिन्न रूपों व दुनिया के बेहतरीन कला रूपों को बढ़ावा देना है। 
पहले दिन संगीत समारोह के मुख्य कलाकारों में प्रख्यात ध्रुपद वोकल नीता रामनाथ, डाॅ. मधु भट्ट तेलांग व पंडित प्रेम कुमार मल्लिक व मृणाल मोहन उपाध्याय(पखावज सोलो) उपस्थित रहे। 
मृणाल मोहन उपाध्याय द्वारा पखावज सोलो की शानदार परफाॅर्मंेस से संगीत संध्या की शुरूआत हुयी। उनके साथ हारमोनियम पर अनुराग मिश्रा, तानपूरा पर आशीष जयसवाल ने संगत दी। 
पंडित मृणाल मोहन उपाध्याय जो कि पंडित वासुदेव उपाध्याय पखावज परंपरा के अंतर्गत आते हैं, उन्होंने सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दो दिवसीय संगीत संध्या के लिए पंडित मृणाल द्वारा पखावज की शानदार शुरूआत रही। 
पहले दिन समारोह की दूसरी कलाकार नीता रामनाथ ने भी लोगों को खूब आकर्षित किया। पंडित प्रशांत मल्लिक की इस शिष्या की प्रस्तुति में पवित्रता के राग गोहरबाणी व खंडरबाणी भी शामिल रही। इन्होंने चार ताल में ’राजा रामचंद्र चढ़यो है त्रिकुट पर’ स्वर से सभी लोगों को झंकृत कर दिया। इनके साथ पखावज में श्री कौशिक मल्लिक व तानपूरे पर विनीत श्रीवास्तव ने संगत दी।
नीता प्रबंधन और अर्थशास्त्र में बिट्स पिलानी से ग्रुजुएट हैं, और लगभग 20 वर्षों से एक्सचेंजर, राबो इंडियन फाइनेंस एंड फीडबैक इंफ्रा जैसी कंपनियों के साथ कार्य कर रही है। 
डाॅ. मधु भट्ट तेलांग द्वारा शानदार प्रस्तुति का कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने जोरदार तालियों के साथ सराहना की। वह राजस्थन की पहली महिला ध्रुपद गायिका है। उन्होंने स्वयं से रचा हुआ राग माला प्रस्तुत कर सभी लोगों का दिल जीता। डाॅ. मधु ने पिछले 35 साल से कई मंचों द्वारा प्रस्तुति से लोगों के दिलों में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है।
इनके साथ ध्रुपद वोकल में पखावज पर मृणाल मोहन उपाध्याय, व तानपुरा शिवम कुशवाह ने संगत दी।
पंडित प्रेम कुमार मल्लिक प्रख्यात संगीत परिवार दरंभगा घराने के सदस्य है, और इस संगीतमय वंश की 12वीं पीढ़ी के प्रतिनिधि है। 19 साल की कम उम्र में इन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा आॅल इंडिया रेडियो संगीत प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। ये अपनी आज की जीवित पीढ़ी के सबसे प्रमुख ध्रुपद गायकों में से एक है। इन्हें कई नेशनल व इंटरनेशनल अवार्ड से नवाजा गया है।पहले दिन कार्यक्रम के अंत में संगीताचार्य पंडित प्रेम कुमार मल्लिक ने राग शंकरा में सूल ताल शंकर महादानी की मन मोहक प्रस्तुति से सभी श्रोताओं का मन मोह लिया। इनके साथ पखावज पर पंडित अनिल चैधरी व कौशिक मल्लिक जबकि तानपुरे पर शिवम कुशवाह व आशीष जैसवाल ने संगत दी।इस मौके पर भारी संख्या में संगीत प्रेमी व अन्य गाणमान्य लोग उपस्थित थे।

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