लोकायुक्त के बिना ज़ीरो टॉलरेंस सिर्फ़ झुंजुना

लोकायुक्त के बिना ज़ीरो टॉलरेंस सिर्फ़ झुंजुना

हिमांशु पैन्यूली

प्रदेश में भ्रष्टाचार को लेकर ज़ीरो टॉलरेंस का राग अलापती TSR सरकार के मंसूबे कुछ स्पष्ट नहीं है एक तरफ़ छोटी-मोटी चिन्दी चोरी, अनियमिताओं के ख़ुलासे से अपने ज़ीरो टॉलरेंस पर सरकार ख़ुद की पीठ तो थपथपाती नज़र आती है लेक़िन वहीं दीमक की तरह राज्य में फैले भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फैंकने के लिए राज्य को सशक्त लोकायुक्त देने में TSR सरकार की मंशा आज जगज़ाहिर है। गैरसैंण में आयोजित बजट सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने से प्रदेशवासियों को लोकायुक्त पर इस बार भी निराश ही होना पड़ा है और सरकार की भी लोकायुक्त के प्रति गंभीरता सब के सामने है। वहीं विपक्ष भी सत्ता के गलियारों में केवल ज़ुबानी जंग तक सीमित दिखायी पड़ता है गैरसैंण बजट सत्र में विपक्ष ने लोकायुक्त लागू करने की माँग पर हंगामा तो ख़ूब किया लेक़िन TSR सरकार ने लोकायुक्त मुद्दे को नज़रअंदाज़ कर ठंडे बस्ते में डाल दिया। वहीं बात अग़र कमज़ोर विपक्ष की करें तो भाजपा के लूज़ पॉइंट्स को भी विपक्ष ठोश मुद्दों में तब्दील नहीं कर पा रहा है। राज्य निर्माण के बाद से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने सत्ता की चाशनी की मिठास का ख़ूब स्वाद  लिया चाहे सत्ता में काँग्रेस हो या भाजपा दोनों ही दलों ने अपनी अपनी बारी में प्रदेश की भोली भाली जनता के साथ सिर्फ़ छलावा ही किया है। राज्य निर्माण के बाद यदि सही मायनों में किन्हीं आंकड़ों में रिकॉर्ड वृद्धि अग़र देखी जाए तो वह ग़बन, घोटालों और बढ़ते भ्रष्टाचार के आंकड़े ही होंगे। चाहे काँग्रेस हो या भाजपा राज्य की छाती में भ्रष्टाचार की मूँग दोनो ही दलों ने ख़ूब दली है। राज्यनिर्माण के 18 वर्षों में भ्रष्टाचार और राज्य पर कर्ज़े का ग्राफ़ दोनों ही जबरदस्त ढंग से बढ़े है यदि प्रदेश में अब तक के घोटालों पर नज़र डाले तो 56 घोटाले, कुंभ घोटाला, स्टर्डिया घोटाला, खनन घोटाला, ढैंचा बीज ख़रीद घोटाला ,एन.एच घोटाला,  खा़द्यान्न घोटाला, आपदा घोटाला, भूमि घोटाला,  देहरादून नगर निगम स्ट्रीट लाईट खरीद का घोटाला आदि करोडों रूपये के घोटाले हुए है लेकिन आज तक इन घोटालों के लिए किसी पर भी कोई कठोर कार्यवाही नहीं हुई चाहे सत्ता में काँग्रेस रही हो या भाजपा दोनो ने बस बारी बारी मनमाफ़िक जाँच समितियां बनाई और उस जांच की आँच को धीरे धीरे ठंडा कर दिया। दोनो ही राजनैतिक दलों ने घोटालों को बस चुनावी समय मे एक दूसरे पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर ज़नता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ ही किया है।

भाजपा की खंडूड़ी सरकार ने सन्न 2011 में भ्रष्टाचार के ख़ात्मे के लिए लोकायुक्त का गठन किया था जिसे राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दे दी गयी थी। लेक़िन यह भी यहाँ की राजनीति की बिडम्बना ही थी कि खंडूड़ी जी के लोकायुक्त को विपक्ष तो विपक्ष ख़ुद भाजपा के कुछ कद्दावरों से पचाया नही गया और सन्न 2012 में काँग्रेस की विजय बहुगुणा सरकार ने सत्ता में काबिज़ होते ही खंडूड़ी के लोकायुक्त कानून को अव्यवहारिक बताकर और उसमें नए सिरे से संसोधन कर दुबारा लागू करने की घोषणा कर उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। जिसके बाद से आज तक प्रदेश की जनता लोकायुक्त के लागू होने का इंतज़ार कर रही है। प्रदेश में भ्रष्टाचार की जद में क्या खद्दरधारी और क्या नौकरशाह सबकी मिलीभगत से आज राज्य में भ्रष्टाचार के आंकड़े चरम पर है। खद्दरधारियों और नौकरशाहों का तालमेल भ्रष्टाचार और घोटालों पर कितना प्रभावी है शायद इसका अंदाज़ा लोकायुक्त के लागू ना होने से ही लगाया जा सकता है क्योंकि लोकायुक्त के लागू होने से इनके नापाक मंसूबों और खायीबॉडी पर लगाम जो लग जाएगी।

वर्तमान में उत्तराखंड की प्रचंड बहुमत से सत्ता में आयी भाजपा सरकार को जनता ने डबल इंजन की सौगात दी सोचा की केंद्र और राज्य में भाजपा के बल से शायद राज्य में विकासकार्यों में तेज़ी आएगी। बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से कुछ मुक्ति मिलेगी लेक़िन वर्तमान स्तिथि से आज प्रदेशवासी काफ़ी आहत है TSR सरकार ने अपनी पहली सालगिरह पर कार्यक्रम कर जहाँ अपने ख़ुद की मुँह मियां मिट्ठू बनी वहीं प्रदेश की वर्तमान स्तिथि चाहे वह स्थायी राजधानी गैरसैंण हो, पलायन हो, भ्रष्टाचार हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो,
चाहे सीमा विस्तार का मामला हो या बेरोजगारों के भविष्य से खिलवाड़ करता हुआ नियुक्तियों में धांधलियों का। हर मामले में न्यायालय का निर्णय सरकार के ख़िलाफ़ ही रहा है। सभी मुद्दे आज सरकार के दावों की पोल खोल रहे है। धरने और प्रदर्शनों से प्रदेश गूँज रहा है। बेरोजगार युवा सड़कों पर लाठियां खा रहा है, कर्मचारी वेतन संकट, चिकित्सा शिक्षा की मनमानी फ़ीस से छात्र प्रदर्शनरत है और भी काफ़ी ही ऐसे मुद्दे है लेक़िन सरकार उन्हें सुलझा पाने में पूर्णतः विफ़ल साबित हो रही है।प्रदेश की जनता द्वारा TSR सरकार को प्रचंड बहुमत से सत्ता में लाने के बावजूद सरकार जनता द्वारा मिले प्रचंड बहुमत का अनादर ही कर रही है। ज़ीरो टॉलरेंस भी सिर्फ़ झुंजुने सा ही साबित हुआ है।

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