तम्बाकू एक धीमा जहर

तम्बाकू जो आज़ देश,समाज के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन गया है। हर साल क़रीब 60 हजार लोगों की मृत्यु तम्बाकू  के कारण होती है। धूम्रपान  करने वालों की संख्या 10-20 वर्ष औसतन कम हो जाती है।
 कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते है कुछ शोकिन होते है जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोक देते है अकेले भारत में 15 करोड़ से अधिक व्यक्ति ध्रूमपान करते है 15 से 49 वर्ष की आयु वर्गtobaco के 30 प्रतिशत लोग तम्बाकू का सेवन करते है। दिल्ली में एक सम्मेलन हाल ही में हुआ है जिसका उदघाटन केन्द्र स्वास्थ्य मंत्री श्री जे0पी0 नड्डा ने किया है जिसमें 179 देशों ने भाग लिया। यह सम्मेलन ग्रेटर नोएडा के नाम से शुरू किया गया था। तम्बाकू एक धीमा जहर है जो सेवन करने वाले व्यक्तियों को धीरे धीरे करके मौत के मुँह में धकेलता ज रह है। लोग जाने अनजाने में तम्बाकू उत्पादों का सेवन करते रहते है धीरे-2 शौक जो  लत में परिवर्तित हो जाता है और तब नशा आनन्द प्राप्त करने के लिए नहीं बल्कि ना चाहते हुए भी आपको नशा अपनी गिरफ़्त में इस क़दर जकड चुका  होता है जिससे कब ज़िन्दगी नर्क होजाए इसका क़ोई  भरोसा नहीं है तम्बाकु उत्पादों का सेवन अनेक रूप से किया जाता है जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, जर्दा आदि यहीं तत्व सबसे ज्यादा घातक होता है इसके अलावा तम्बाकू में अन्य बहुत से कैंसर उत्पन्न करने वाले तत्व पाये जाते है। धूम्रपान एवं तम्बाकू के सेवन  से मुंह, गला, श्वासनली व फेफड़ो का  कैसर होता है दिल की बीमारियां , उच्च रक्तचाप पेट के अल्सर आदि लोगों  को रोगों की सम्भावना तम्बाकु उत्पादों के सेवन से बढ जाती है तम्बाकू की लत के कारण दूसरों की देखा देखी, कभी बुरी संगत में पडकर कभी मित्रों के दबाव में कई बार कम उम्र में खुद को बडा दिखाने की चाहत में वो कभी धुंए के छल्ले उडाने की ललक कभी कभी तो फिल्म में अपने प्रिय एैक्टर को देखकर ध्रुमपान करते देखकर अधिक लोग अपने दोस्तों के साथ सिगरेट, गुटखा, जर्दा आदि का शौकिया रूप में सेवन करते है शौक कब आदत में बदल जाती है पता ही नहीं चलता और जब पता चलता है तब तक शरीर को बहुत नुकसान पहुंच चुका होता है।

पूजा ऐंठानी
बी.ए (माॅस कम्युनिकेशन)

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