डीसीएलएफ 2017 कड़ी के लघु नाटक में पहुंचे ‘उस्ताद अमजद अली खान‘

‘मास्टर आॅन मास्टर्स‘ का बुक लांचिंग कार्यक्रम हुआ आयोजित
 
26 मार्च, देहरादून – राजपूर रोड स्थित डब्ल्यूआईसी इंडिया में ‘उस्ताद अमजद अली खान‘ की पुस्तक ‘मास्टर आॅन मास्टर्स‘ का बुक लांचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। देहरादून कम्युनिटी लिट्रेचर फैस्टिवल (डीसीएलएफ) 2017 कड़ी  के लिए यह कार्यक्रम नाटकीय मंचन भी था। बुक लांचिंग कार्यक्रम के बाद पेंगुविन रैंडम हाउस द्वारा पब्लिश इस पुस्तक पर चर्चा हुयी। डेली मिलाप के सीनियर एडिटर व डीसीएलएफ के डायरेक्टर ऋषि सूरी, ने ‘उस्ताद अमजद अली खान‘ के साथ इस पुस्तक पर चर्चा की। डब्ल्यूआईसी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर सचिन उपाध्याय द्वारा बुक लांचिंग की गयी।
सरोद वादक ‘उस्ताद अमजद अली खान‘ ने इस अवसर पर कहा कि, उनकी दुनिया संगीत है, और एक अलग दुनिया में जाकर उन्होंने यह पुस्तक लिखी है। उन्होेंने कहा कि, यह पुस्तक वे अपने पिता को समर्पित करते हैं। 
पुस्तक के बारे में उन्होंने कहा कि, उनके गुरू जी उन्हे हमेशा कहते थे कि, कोई भी संगीतकार छोटा या बड़ा नही होता है। सभी संगीतज्ञों की खुबियों व अच्छी बातों को हमें अपने जीवन में शामिल करना चाहिए, और यही वजह है कि उन्होंने यह पुस्तक लिखी। उस्ताद ने कहा कि, वे परंपरागत चीजों के पालन करने पर वे बिल्कुल विश्वास नहीं करते। अगर कोई पुरानी गलत प्रथाएं चली आ रही है तो हमे उसके लिए प्रश्न उठाने चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि, संगीतकारों की कविता शब्दों में न होेकर संगीत में होती है। स्वर हमें भग्वान से जोड़ने व मिलाने का कार्य करते हैं। जब उस्ताद से संगीत के बारे में पूछा गया तों उन्होंने कहा कि, संगीत उनके लिए व्यवसाय नही है, बल्कि संगीत में उनका जीवन है। उन्होंने कहा कि, संगीत की दुनिया में की-बोर्ड का एक अलग योगदान है।
क्लासिकल म्यूज़िक संगीत एक अलग सुरंग है। 
उस्ताद अमजद अली खान संगीत की दुनिया के अनुभवी संगीतकार और ‘सरोद‘ वादकों में से एक हैं। दुनियाभर को अपने संगीत का रसिक बनाने वाले अमजद को अब तक पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण जैसे अनेक पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
इस मौके पर डब्ल्यूआईसी इंडिया की प्रेजीडेंट नाज़िया युसूफ इजु़द्दीन ने कहा कि,
भारतीय संगीत के जरिए विश्व में सद्भावना का संदेश प्रसारित करने वाले अमजद ने भारतीय व पारंपरिक संगीत को न सिर्फ जीवित रखा है, बल्कि अनेक मौलिक रचनाओं के साथ संगीत को नया जीवन प्रदान किया है। अमजद ऐसे संगीतकार हैं, जिन्हें न सिर्फ संगीत के प्रति समर्पण के लिए बल्कि, उसकी परंपरा को संजोए रखने के लिए भी जाना जाता है। अमजद अली खान ने ‘सरोद‘ वाद्य से भारतीय संगीत परंपरा को अनुकूलता के साथ परिवर्धित कर निर्मित किया है।
नाज़िया ने यह भी कहा कि, हमारे जीवन में संगीत ‘संजीवनी‘ की तरह काम करती है। डब्ल्यूआईसी इंडिया का मुख्य उद्देश्य देश की ललित कलाओं की खूबियांे, शुद्धता और विविधता को बनाए रखना और कलाकारों को प्रोत्साहित करना है।
डीसीएलएफ के डायरेक्टर ऋषि सूरी ने कहा कि, डब्ल्यूआईसी इंडिया समय समय पर सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करवाता है। साथ ही उन्होंने इस चर्चा के दौरान इस पुस्तक से संबंधी कई प्रश्न भी पूछे।

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