फ़िर लटकी लोकायुक्त की नियुक्ति

फ़िर लटकी लोकायुक्त की नियुक्ति

  • सरकार के लिए बड़ा झटका

  • लोकायुक्त पर सियासत गर्म 

देहरादून,उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति फ़िर लटकती दिख रही है।उत्तराखंड के राज्यपाल के.के पॉल ने लोकायुक्त की फाइल एक बार फ़िर कड़ी आपत्तियों के साथ लौटा दी है। राज्यपाल पॉल संभावित लोकायुक्त के नाम पर संतुष्ट नहीं हैं।उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति फिर लटक गई है। राजभवन से लोकायुक्त की फाइल एक बार फ़िर लौटा दी गई है। बताया गया है कि राज्यपाल संभावित लोकायुक्त के नाम पर संतुष्ट नहीं हैं।राज्यपाल के.के पाल की तरफ से लोकायुक्त की फाइल में कईं कड़ी आपत्तियां जतायीं गई हैं।
आपको बता दे की ये दूसरा मौक़ा है जब यह फ़ाइल राज्यपाल द्वारा लौटाई गयी है इस से पूर्व भी इसी  साल अगस्त के आखरी हफ़्ते में भी राजभवन ने कड़ी आपत्तियों के साथ सरकार को लोकायुक्त की फाइल लौटा दी थी।
उस वक्त राजभवन के फाइल लौटाने के मामले में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि राजभवन के संदेश का अध्ययन करके सुधार किया जाएगा।
सरकार के दावे पर भरोसा करें तो दूसरी बार लोकायुक्त की फाइल राजभवन भेजने से पहले सभी अपत्तियों का यथासंभव निराकरण करने का प्रयास किया गया था।
अब जब दूसरी बार भी राजभवन ने लोकायुक्त की फाइल सरकार को लौटा दी है तो यह सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
लोकायुक्त के लिए गठित सर्च कमेटी की अंतिम बैठक अगस्त में हुई थी, जिसमें हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जेसीएस रावत का नाम लोकायुक्त के लिए फाइनल किया गया था। राज्यपाल ने आपत्तियों में रावत के नाम पर कईं स्पष्टीकरण सरकार से मांगे हैं।
पहली बार राज्यपाल ने लोकायुक्त कानून के प्रावधानों का पालन न किए जाने को लेकर फाइल लौटा दी थी। सरकार से लोकायुक्त चयन कमेटी और सर्च कमेटी की कार्यवाही में नियमों का पालन करने को कहा था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में लोकायुक्त को एक अहम हथियार माना जा रहा है। लोकायुक्त के इर्द गिर्द ही वर्ष 2012 का विधानसभा चुनावी अभियान भी रहा था। पहले केंद्र में लोकायुक्त लटका रहा और उसके बाद मजबूत और सशक्त लोकायुक्त बनाने की दलीलों के बीच लोकायुक्त एक्ट में संशोधन को लेकर राज्य सरकार की कवायद चलती रही।
करीब तीन महीने पहले राज्य सरकार ने सर्च कमेटी और सेलेक्शन कमेटी की कार्यवाई और संस्तुतियों को पूरा करते हुए लोकायुक्त गठन की फाइल राजभवन भेजी थी।
सर्च कमेटी की संस्तुतियों के आधार पर चयन कमेटी ने लोकायुक्त चेयरमैन और 4 सदस्यों के कुल पांच पदों पर 3-3 नामों का पैनल बनाकर राज्यपाल को भेजा था। जिस पर राज्यपाल ने पांचों पदों पर सभी आवेदनकर्ताओं की फाइल मांगी थी।
शासन ने पांचों पदों पर सभी करीब 120 आवेदकों की डिटेल राजभवन भेजी थी। इसके बाद सभी विवरण का राज्यपाल ने अध्ययन करने के बाद सरकार को लोकायुक्त की फाइल लौटा दी थी।
राज्यपाल ने लोकायुक्त गठन की प्रक्रिया में लोकायुक्त एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने और अनदेखी करने की बात कही थी। साथ ही टिप्पणी करते हुए कहा था कि लोकायुक्त सर्च कमेटी और चयन कमेटी में नियमों का पालन करके सारी कार्यवाही नए सिरे से की जाए।
अब जब दूसरी बार भी लोकायुक्त की फाइल राजभवन से सरकार को लौटा दी गई है। हरीश रावत सरकार के लिए इसे बड़ा झटका मांगा माना जा रहा है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि लगता है कि राज्यपाल के.के पॉल दिल्ली के एल.जी नजीब जंग की राह पर चल पड़े हैं। लोकायुक्त की फाइल को दूसरी बार लौटाने के अलावा और भी कई बड़े मामलों से जुड़ी फाइलें सरकार को लौटाकर झटका दे चुके हैं।
कुल मिलाकर जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहें हैं,लोकायुक्त पर सियासत गर्माती जा रही है। इस बार भी लोकायुक्त अस्तित्व में आएगा कि नहीं, कहा नहीं जा सकता, लेकिन इस पर राजनीति होना तय नजर आ रहा है।

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