सीएम त्रिवेंद्र, प्रेमचंद अग्रवाल एवं डा.निशंक ने कहा…

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड प्रेम चंद अग्रवाल तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं निवर्तमान सांसद डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने राम नवमी – नवरात्री एवं डा. भीमराव आंबेडकर 128 वीं जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए सभी के सुखमय तथा मंगलमय जीवन की शुभ कामनायें दी हैं।   
 
इसके साथ ही जलियावाला बाग हत्याकांड के 100वीं बरसी पर जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की हैं।
रामनवमी की बधाईयां देते हुये डा. रमेश पोखरियाल ने कहा कि भगवान राम द्वारा स्थापित जीवन मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं। उनके आदर्श, समर्पण एवं त्याग को अपनाकर राज्य और देश की प्रगति में पूरी निष्ठा के सहभागी बनें। रामनवमी जैसे पर्व राष्ट्रीय एकता, अखण्डता तथा देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हैं। मैं राज्यवासियों से आह्वान करता हूं कि पावन पर्व रामनवमी को आपसी भाईचारा, पारस्परिक प्रेम, सामाजिक सद्भाव के साथ मिल-जुलकर हर्षोल्लास के साथ मनाएं।
13 अप्रैल के दिन भारतिय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 128वीं जयंती पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुये विधान सभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि वे बाबा साहब के सिद्धांतों का अनुसरण कर समाज में समानता, समरसता एवं भाईचारे की स्थापना करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
इसके साथ ही आज ही के दिन 13 अप्रैल के दिन जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये। मुख्यमंत्री
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश भारत के इतिहास का काला अध्याय है। आज से 100 साल पहले 13 अप्रैल, 1919 को अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में मौजूद निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी थीं। इस हत्याकांड में 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जबकि 1,500 से भी ज्यादा घायल हुए थे. जिस दिन यह क्रूरतम घटना हुई, उस दिन बैसाखी थी। इसी हत्याकांड के बाद ब्रिटिश हुकूमत के अंत की शुरुआत हुई। इसी के बाद देश को ऊधम सिंह जैसा क्रांतिकारी मिला और भगत सिंह के दिलों में समेत कई युवाओं में देशभक्ति की लहर दौड़ गई।
आज के दिन जलियांवाला बाग के सौ साल पूरे होने पर इस साल क्रूरता भरे नरसंहार को शोक के तौर पर मनाने व जनरल डायर की गोलियों का निशाना बने लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए इस बार शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है।

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