उत्तराखंड में प्रतिष्ठा की लड़ाई के 2 दिन !

मोदी लहर के सहारे उत्तराखंड में दोबारा पांचों सीटों पर काबिज होने का दावा कर रही भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस ने अपनी शतरंजी चाल में उलझा दिया है। इन दोनों दलों में मुकाबला रोचक हो गया है। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर दांव लगाया है तो भाजपा ने भी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक और प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट पर भरोसा जताया है।
सूबे की पांच लोकसभा सीटों पौड़ी गढ़वाल, टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल और अल्मोड़ा पर अभी भाजपा ही काबिज है। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश से पृथक कर उत्तराखंड राज्य बनाने का श्रेय भारतीय जनता पार्टी को जाता है और भाजपा हर चुनाव में इस उपलब्धि को ‘‘हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे’’ के नारे के साथ दोहराती भी है। केंद्र की राजनीति में उत्तराखंड के नेताओं का खासा दखल रहा है। हेमवती नंदन बहुगुणा, पंडित नारायण दत्त तिवारी, ब्रह्मदत्त, के सी पंत और भक्त दर्शन इनमें से प्रमुख रहे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विकास की दौड़ में पिछड़ेपन के कारण लंबे अरसे से यहां की जनता अलग राज्य की मांग कर रही थी। 
इन चुनावों में पौड़ी गढ़वाल सीट और नैनीताल सीट पर रोचक मुकाबला है। पौड़ी सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी को पार्टी ने टिकट नहीं दिया। खंडूरी केंद्र के एक फैसले को लेकर बहुत आहत थे। उन्हें रक्षा कमेटी के चेयरमैन पद से अचानक हटाया गया। चेयरमैन रहते मेजर जनरल खंडूरी ने रक्षा कमेटी को सौंपी रिपोर्ट में रक्षा उपकरणों को लेकर कुछ ऐसी तलख टिप्पणियां की थीं जो प्रधानमंत्री को नागवार गुजरी। उधर खंडूरी के पुत्र मनीष को इस बीच कांग्रेस अपने साथ जोडने में कामयाब हो गई और बिना वक्त गंवाए कांग्रेस हाईकमान ने मनीष को पौड़ी गढ़वाल से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। कांग्रेस के इस दांव से प्रदेश भाजपा के नेता भी सकते में आ गए। हालांकि पिता भुवन चंद खंडूरी का इस पूरे मामले में रवैया बिल्कुल स्पष्ट है कि मनीष के फैसले से उनका कोई सरोकार नहीं लेकिन मनीष के पास अपने पिता की राजनीतिक विरासत में तीन दशकों के उनके योगदान को गिनाने के अलावा और कुछ भी नहीं है। नामांकन करने के बाद मनीष ने अपनी पहली सभा में ही एक मार्मिक वक्तव्य से यह इशारा कर दिया कि भले ही वह राजनीति में नए हों लेकिन पिता की छत्रछाया और राजनीतिक धूप छांव के हर मौसम का उनको पूरा तजुर्बा है।
भुवन चंद खंडूरी इसलिए भी धर्म संकट में हैं क्योंकि मनीष के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी तीरथ सिंह रावत को मेजर जनरल खंडूरी का राजनीति में दत्तक पुत्र माना जाता है। तीरथ सिंह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्य में मंत्री भी रहे हैं । इस जटिल त्रिकोण में जनता भी दोराहे पर खड़ी है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मनीष की जीत में तो पिता की जीत है लेकिन हार में भी पिता की ही जीत है।
दूसरा रोचक मुकाबला कुमाऊं मंडल की नैनीताल उधम सिंह नगर सीट पर है। यहां अप्रत्याशित फैसला लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने सबको हैरत में डाल दिया है। मुख्यमंत्री रहते हुए हालांकि रावत का पूरे राज्य में ही संगठित जनाधार रहा है बावजूद इसके कि पिछले चुनाव में उनको पराजय का मुंह देखना पड़ा था। हरीश रावत के मुकाबले में भाजपा ने रावत के पारंपरिक विरोधी रहे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को मैदान में उतारा है। पिछली विधानसभा में जब कांग्रेस के ही 10 बागी विधायकों ने हरीश रावत सरकार को गिराने की पटकथा रची थी तब उसके निर्देशक के रूप में अजय भट्ट का नाम ही सामने आया था। हरीश रावत कैंप हालांकि इस मर्तबा खासा जोश में है और जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।
हरिद्वार संसदीय सीट पर निवर्तमान सांसद डॉ रमेश पोखरियाल निशंक पर पार्टी ने दोबारा भरोसा जताया है। मजेदार बात यह है कि पांचों सीटों में से कांग्रेस भी इस सीट को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही है। यहां पूर्व विधायक अमरीश कुमार को कांग्रेस ने निशंक के खिलाफ मैदान में उतारा है। निशंक दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और राज्य गठन पूर्व से क्षेत्र का विधान सभा में प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।
अल्मोड़ा सीट पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा के सामने भाजपा ने केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा को मैदान में उतारा है। अल्मोड़ा में राष्ट्रीय मुद्दों की लहर का मतदाताओं पर ज्यादा असर रहता है।
टिहरी लोकसभा सीट पर वर्तमान सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह के मुकाबले पर कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को मैदान में उतारा है। प्रीतम सिंह की गिनती एक ईमानदार और चरित्रवान नेताओं में होती है। इस संसदीय सीट के तहत चकराता विधानसभा से प्रीतम सिंह के पिता गुलाब सिंह निर्विरोध विधायक भी रहे हैं। प्रीतम की जमीनी पकड़ मजबूत होने की वजह से निवर्तमान सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह के लिए मुकाबला थोड़ा कड़ा हो गया है।
बहरहाल सूबे की पांच लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों के अलावा 55 अन्य प्रत्याशी मैदान में है। कुल 65 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें छह महिला प्रत्याशी हैं। गढ़वाल से 12, टिहरी से 15 हरिद्वार से 20 नैनीताल से 10 और अल्मोड़ा से आठ प्रत्याशी मैदान में है। पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में कुल 95 प्रत्याशियों ने नामांकन किए थे।
भारतीय जनता पार्टी सर्जिकल स्ट्राइक, भ्रष्टाचार और ‘‘मैं भी चैकीदार हूँ’’ के साथ और ढेर सारे स्थानीय मुद्दों के को लेकर कांग्रेस से मुकाबले के लिए कमर कस चुकी है वहीं कांग्रेस को राहुल गांधी के हालिया ‘‘गरीबी हटाओ’’ और न्यूनतम आय गारंटी की घोषणा से उत्तराखंड में नई ऑक्सीजन मिली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Next Post

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए बीजेपी का संकल्प पत्र (घोषणापत्र) !

Mon Apr 8 , 2019
बीजेपी ने संकल्प पत्र के नाम से आज लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। पार्टी ने अपने घोषणापत्र में किसान, गरीब और मध्यम वर्ग के लिए कई सारी घोषणाएं की हैं। बता दें कि लोकसभा चुनाव के लिए 11 अप्रैल को पहले चरण के लिए वोटिंग […]

Chief Editor

Johny Watshon

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat. Duis aute irure dolor in reprehenderit in voluptate velit esse cillum dolore eu fugiat nulla pariatur

Quick Links