किसके नाम होगी बीसी खंडूड़ी की राजनीतिक विरासत !

विरासत की दिलचस्प बनती जंग गढ़वाल लोकसभा

दीप्ति रावत ने जुबानी जंग शुरू कर दी है। 

कोटद्वार से भगवान सिंह की रिपोर्ट।

मनीष खंडूड़ी। वो नाम है, जिसने उत्तराखंड राजनीति में एक नई बहस खड़ी कर दी है। उनको हर कोई अपने पिता जनरल बी.सी. खंडूड़ी के राजनीतिक वारिस के रूप में देखना चाहता था, लेकिन उन्होंने कांग्रेस का दामन थामकर एक नई राजनीति और बहस को जन्म दिया और अपना राजनीतिक कैरियर शुरू कर दिया है। 

मनीष खंडूड़ी के नामांकन में भारी भीड़ी उमड़ पड़ी। भीड़ को देख कर कोई हैरान था। लोग यह आंकलन करते दिखे कि दो दिन पहले राजनीति में कदम रखने वाले मनीष को इतना समर्थन कहां से और कैसे मिल रहा है। 

इस पर मनीष खंडूड़ी ने कहा है कि मेरी विचारधारा व ख्यालात कांग्रेस से मिलते हैं। यह चेहरों की नहीं बल्कि विचारधारा की लड़ाई है। पौड़ी क्षेत्र उनके लिए नया नहीं है। वह क्षेत्र की समस्या अच्छी तरह जानते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यमकेश्वर से विधायक बहन ऋतु खंडूड़ी व पिता बीसी खंडूड़ी द्वारा भाजपा का प्रचार करने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। पिता व बहन अपना कर्म कर रहे हैं और मैं अपना। 

बता दें कि मनीष खंडूडी के नामांकन के दौरान और उनके साथ प्रचार में उमडी रही भीड को देखते हुये सतपुली में राज्य मंत्री दीप्ति रावत ने जुबानी जंग शुरू कर दी है। उनका कहना कि नामांकन के दौरान जमा लोगों की भीड कांग्रेस की प्रायोजित व धन बल की भीड़ थी। जब कि भाजपा के तीरथ रावत के नामांकन में लोग अपनी मर्जी से आये थे और तीरथ रावत किसी पहचान के मोहताज नही है। जबकि मनीष खण्डूरी को कोई नही जानता।

इस सब में महत्वपूर्ण यह है कि बीसी खंडूड़ी के बेटे और राजनैतिक बेटे में जंग चल रही है इसलिए खंडूड़ी फैक्टर महत्वपूर्ण हो गया है। यह तो चुनाव ही तय करेगा कि बीसी खंडूड़ी की राजनीतिक विरासत किसके नाम होगी।  

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